CG DMF Scam : ED की बड़ी कार्रवाई…! 4 करोड़ नकद और 10 किलो चांदी की ईंटें बरामद
बीज निगम के नाम पर हुआ करोड़ों का गबन
रायपुर, 06 सितंबर। CG DMF Scam : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF (District Mineral Foundation) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। 3 और 4 सितंबर 2025 को की गई दो दिवसीय छापेमारी के दौरान एजेंसी ने 28 ठिकानों पर दबिश दी। इस दौरान 4 करोड़ रुपए नकद और 10 किलो चांदी की ईंटें जब्त की गईं। साथ ही कई संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल डिवाइसेज भी कब्जे में ली गई हैं।
ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, इन दस्तावेजों में भ्रष्टाचार और अवैध लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं। पूरी कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत की गई।
बीज निगम के नाम पर हुआ करोड़ों का गबन
ईडी के मुताबिक, यह घोटाला छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड (बीज निगम) के माध्यम से अंजाम दिया गया। कृषि उपकरण, पल्वराइज़र, मिनी दाल मिल और बीज सप्लाई करने के नाम पर फर्जी खर्च दिखाकर वेंडर्स और ठेकेदारों को ठेके दिए गए। इन ठेकों में 40 से 60% तक कमीशन वसूला गया, जिसे लाइजनरों के जरिए अफसरों और नेताओं तक पहुंचाया गया। जांच में सामने आया है कि इसी प्रक्रिया में लगभग 350 करोड़ रुपए की DMF राशि के दुरुपयोग का अंदेशा है।
FIR के आधार पर की गई कार्रवाई
ईडी ने इस कार्रवाई की शुरुआत छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज FIRs के आधार पर की। FIR में ठेकेदारों, वेंडर्स और सरकारी अधिकारियों पर खनन प्रभावित क्षेत्रों की DMF राशि के दुरुपयोग का आरोप है।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
इससे पहले ईडी इस केस में ₹21.47 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर चुकी है। विशेष PMLA कोर्ट, रायपुर में दाखिल अभियोजन शिकायत में अब तक 16 आरोपियों को नामजद किया गया है। अब तक गिरफ्तार किए गए प्रमुख आरोपी, निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू, राज्य सेवा अधिकारी माया वॉरियर और GO से जुड़े मनोज कुमार द्विवेदी है।
ED का बयान
ईडी अधिकारियों के अनुसार, “DMF फंड के दुरुपयोग की इस श्रृंखला में कई ठेकेदार, वेंडर और सरकारी अधिकारी मिले हुए थे। बीज निगम का उपयोग कर योजनागत तरीके से पैसे की हेराफेरी की गई। सभी ठिकानों से मिले दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।”
क्या है DMF फंड?
DMF (जिला खनिज प्रतिष्ठान) एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट होता है, जिसे खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए खनन कंपनियों से प्राप्त राशि से बनाया जाता है। इसका उद्देश्य है कि जिन क्षेत्रों में खनन होता है, वहां की जनता को स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और आधारभूत सुविधाओं में मदद मिल सके। लेकिन छत्तीसगढ़ में यही राशि भ्रष्टाचार का माध्यम बन गई।



