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VDO बेघर होते बिजली कर्मचारी! बिना Allotment तोड़े जा रहे CSEB के क्वार्टर, आखिर कौन सुनेगा इनकी फरियाद?

कोरबा। ऊर्जाधानी कोरबा से इस वक्त एक बेहद संवेदनशील और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (CSEB) के उन कर्मचारियों पर आज बेघर होने का संकट मंडरा रहा है, जो चौबीसों घंटे अपनी जान जोखिम में डालकर पूरे प्रदेश को रोशन रखते हैं। बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था या नए आवंटन के, विभाग के क्वार्टरों को तोड़े जाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस तानाशाही रवैये से नाराज और परेशान बिजली कर्मियों के बीच भारी आक्रोश है, और अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि “सबको रोशनी देने वालों के आशियाने में अंधेरा क्यों?”

 

 

 

क्या है पूरा मामला? (The Ground Reality)

 

 

मिली जानकारी के अनुसार, कोरबा के बिजली विभाग (CSEB) कॉलोनी में सालों से रह रहे कर्मचारियों के क्वार्टरों को ढहाने (Demolition) की प्रक्रिया शुरू की गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें नए क्वार्टर आवंटित किए बिना और बिना किसी उचित समय या पूर्व सूचना के सीधे बुलडोजर और हथौड़े चलाए जा रहे हैं।

 

 

कर्मचारियों का दर्द: “हम सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अगर क्वार्टर जर्जर हैं या किसी नए प्रोजेक्ट के लिए इन्हें खाली कराया जा रहा है, तो नियम के मुताबिक हमें पहले दूसरा क्वार्टर अलॉट किया जाना चाहिए। बिना अलॉटमेंट के हमारे आशियाने उजाड़े जा रहे हैं, हम अपने परिवार और बच्चों को लेकर इस भीषण गर्मी में कहाँ जाएं?”

 

 

सुलगते सवाल: व्यवस्था पर खड़े होते गंभीर निशान

इस पूरी कार्रवाई ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

 

बिना आवंटन कार्रवाई क्यों? जब तक कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक आवास (Alternate Housing) की व्यवस्था नहीं थी, तब तक यह तोड़फोड़ इतनी जल्दबाजी में क्यों की जा रही है?

नियमों को ताक पर क्यों रखा गया? किसी भी सरकारी या विभागीय आवास को खाली कराने और तोड़ने की एक तय कानूनी प्रक्रिया होती है, क्या यहाँ नियमों की अनदेखी हुई है?

इस भीषण गर्मी में अमानवीयता क्यों? मई-जून की इस रिकॉर्ड तोड़ गर्मी में, जब पारा आसमान छू रहा है, परिवारों को बेघर करना कितना न्यायसंगत है?”जो प्रदेश को रोशन करते हैं, उनके खुद के आशियाने उजाड़े जा रहे हैं”

 

 

बिजली विभाग के मैदानी और तकनीकी कर्मचारी दिन हो या रात, आंधी हो या तूफान, अपनी जान की परवाह किए बिना बिजली सप्लाई चालू रखते हैं। आज जब उन पर खुद मुसीबत आई है, तो प्रबंधन से लेकर स्थानीय प्रशासन तक मौन साधे बैठा है। कर्मचारियों का साफ कहना है कि यदि उनकी समस्याओं को तुरंत नहीं सुना गया और इस एकतरफा कार्रवाई को नहीं रोका गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

 

 

अब देखना यह होगा कि कोरबा का जिला प्रशासन और CSEB का उच्च प्रबंधन इस मामले में दखल देता है या फिर इन बिजली कर्मियों की आवाज ‘अंधेरे’ में ही गुम हो जाएगी।

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