Teejan Bai Death : प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन…! रायपुर AIIMS में ली अंतिम सांस
देश के सर्वोच्च सम्मानों से हुईं सम्मानित
रायपुर, 05 जुलाई। Teejan Bai Death : छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण और सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई का रविवार तड़के 3:15 बजे रायपुर एम्स में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं और उनका उपचार AIIMS में चल रहा था। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के कला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार रात ही तीजन बाई के परिजनों से फोन पर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। उनके निधन की खबर सामने आते ही कलाकारों, साहित्यकारों और संस्कृति प्रेमियों ने गहरा दुख व्यक्त किया।
पंडवानी को दुनिया के मंच तक पहुंचाया
तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनूठी शैली से पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं, विशेषकर दुशासन वध जैसे प्रसंगों की उनकी प्रस्तुति ने करोड़ों लोगों को मंत्रमुग्ध किया। उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी, तुर्की, माल्टा, साइप्रस, रोमानिया और मॉरीशस सहित कई देशों में भारत की लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया।
देश के सर्वोच्च सम्मानों से हुईं सम्मानित
लोककला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्म भूषण (2003) और पद्म विभूषण (2019) से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें फुकुओका पुरस्कार, नृत्य शिरोमणि सम्मान और चार मानद डी.लिट. उपाधियां भी मिलीं।
गरीबी से विश्व मंच तक का सफर
8 अगस्त 1956 को दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के अटारी गांव में जन्मी तीजन बाई ने बेहद कठिन परिस्थितियों में अपना बचपन बिताया। मात्र 9 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने नाना बृजलाल पारधी से पंडवानी सीखना शुरू किया और 13 वर्ष की उम्र में पहला सार्वजनिक मंचन किया। इसके बाद उनकी प्रतिभा गांवों से निकलकर देश और दुनिया तक पहुंच गई।
तीजन बाई का जाना केवल छत्तीसगढ़ के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनकी आवाज़ और उनकी कला आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।






