Featuredछत्तीसगढ़सामाजिक

Breaking : पशु आहार में मिलावट का खेल, डेयरी कारोबारी और पशुपालक परेशान

दाल चूनी में 15 से 20 प्रतिशत तक मिट्टी मिलाने की शिकायत,खली में रफी और कोढ़ा मिलाने का आरोपक,म कीमत के नाम पर पोहा चूनी की गुणवत्ता पर संदेह।खाद्य विभाग की जांच व्यवस्था पर उठ रहे सवाल।

बलौदाबाजार- मिलावट का दायरा अब इंसानों के खाने से आगे बढ़कर पशुओं के आहार तक पहुंच गया है। जिले में पशुपालक और डेयरी कारोबारी शिकायत कर रहे हैं कि अरहर, उड़द, मूंग और चना चूनी में भारी मात्रा में मिट्टी मिलाई जा रही है। इतना ही नहीं, खल्ली में भी घटिया सामग्री और रफी मिलाने की बात सामने आ रही है।
जहां एक ओर मानव आहार की जांच को लेकर प्रदेश स्तर पर लगातार कार्रवाई हो रही है, वहीं पशु आहार की जांच को लेकर खाद्य विभाग की सक्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि अब पशुपालक खुद ही सतर्क खरीदी को मिलावट से बचने का एकमात्र उपाय मान रहे हैं।

 सबसे ज्यादा मिलावट इनमें

उड़द, मूंग, अरहर और चना चूनी में 15 से 20 प्रतिशत तक मिट्टी मिलाने की जानकारी मिल रही है। कुछ इकाइयों पर कालातीत हो चुके दलहन को भी मिलाने का आरोप है। ये सभी पशुओं के नियमित आहार का हिस्सा हैं, इसलिए मिलावट का सीधा असर दूध उत्पादन और पशुओं की सेहत पर पड़ रहा है। कई डेयरियां अब वैकल्पिक आहार की तलाश में जुट गई हैं।

 संदेह पोहा चूनी में भी

पोहा चूनी की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। बाजार में कम कीमत के चलते इसकी मांग बढ़ रही है, लेकिन यही कम कीमत शंका को जन्म दे रही है। डेयरी संचालकों का कहना है कि बेहतर मौसम के बावजूद पशुओं की सेहत में गिरावट देखी जा रही है। इस वजह से कई पशुपालक अब खुद अपने स्तर पर पशु आहार तैयार कर रहे हैं।

अब मिलावटी खली

बिनोला, सोयाबीन, अलसी और सरसों की खल्ली को पशु आहार में बेहतर माना जाता है और इनकी सालभर मांग रहती है। आरोप है कि कुछ उत्पादन इकाइयां इसमें कोढ़ा या रफी मिलाकर बाजार में खपा रही हैं। खुदरा दुकानों की भूमिका भी सवालों में है, क्योंकि इन्हीं के जरिए यह आहार सीधे पशुपालकों तक पहुंच रहा है।

 किससे और कहां करें शिकायत?

नियम के मुताबिक खाद्य शाखा में पदस्थ खाद्य निरीक्षकों को अपने क्षेत्र की पशु आहार उत्पादन इकाइयों और विक्रेताओं की नियमित जांच करनी होती है। लेकिन स्थानीय स्तर पर जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिला खाद्य अधिकारी और संबंधित निरीक्षकों की निष्क्रियता के कारण पशु आहार में मिलावट का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है।
अब पशुपालकों की मांग है कि पशु आहार की भी सख्ती से जांच हो, ताकि मवेशियों की सेहत और डेयरी कारोबार दोनों सुरक्षित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button