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खाकी वाले रियल धुरंधर! 490 दरोगा एकसाथ देखने पहुंचे Dhurandhar 2, खुद मेरठ SSP ने बुक किए दो सिनेमाघर

मेरठ: Dhurandhar 2 उत्तर प्रदेश के मेरठ में एसएसपी अविनाश पांडेय का अलग ही रूप सामने आया है। वे नए बैच के 498 दरोगा के साथ ‘ धुरंधर 2 ‘ फिल्म देखने पहुंच गए। फिल्म में जिस प्रकार से खुद और अपने परिवार के ऊपर देश को रहने की सीख दी गई है, उसे दरोगा तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। भले ही यह फिल्म कॉमर्शियल हो, लेकिन इसने जिस प्रकार से देशभक्ति की भावनाओं को जगाया, वही भावना नए दरोगा में भरने की कोशिश करते नजर आए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान समय में किस प्रकार काम करना चाहिए। माफियाओं के नेटवर्क को कैसे ध्वस्त करना चाहिए, सब कुछ एक ट्रेनिंग के तौर पर देखा जा रहा है।

मेरठ में पुलिस विभाग की कार्यशैली को लेकर एक अलग ही पहल सामने आई है। आमतौर पर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जानी जाने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस बार अपने पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग देने के लिए एक अनोखा रास्ता सिनेमा को चुना। मेरठ जिले के एसएसपी अविनाश पांडेय नेनए बैच के 498 दरोगाओं के साथ सिनेमा हॉल में धुरंधर 2 मूवी देखी।

 

दो हॉल किए बुक

दरअसल, मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडेय अपने साथ 498 दरोगाओं को लेकर दिल्ली रोड स्थित शॉपिंग मॉल के वेव सिनेमा पहुंचे। अपने सभी नए बैच के दरोगा के साथ धुरंधर-2 फिल्म देखी। इस विशेष आयोजन के लिए मल्टीप्लेक्स के दो हॉल बुक किए गए थे, जिससे यह कार्यक्रम न सिर्फ विभाग के भीतर बल्कि पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया।

बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मी सरकारी गाड़ियों के काफिले के साथ सिनेमा हॉल पहुंचे, जिसे देखने वालों के लिए यह दृश्य किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। हालांकि, इस पहल के पीछे का मकसद केवल मनोरंजन नहीं था, बल्कि इसे एक तरह की सिनेमाई ट्रेनिंग के रूप में देखा जा रहा है।

फिल्म में यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली

माफिया नेटवर्क का मुकाबला और एक पूर्व डीजीपी के मजबूत किरदार को प्रमुखता से दिखाया गया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि फिल्मों के माध्यम से जटिल परिस्थितियों, रणनीतियों और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी ढंग से समझाया जा सकता है। यही वजह है कि इस फिल्म को ट्रेनिंग टूल के रूप में चुना गया।

पुलिस विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस तरह की पहल से पुलिसकर्मियों को न सिर्फ नए दृष्टिकोण मिलते हैं, बल्कि उनका मनोबल भी बढ़ता है। लगातार तनाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए यह एक तरह का मानसिक रिफ्रेशमेंट भी साबित हो सकता है।

लोगों की आई प्रतिक्रिया

हालांकि, इस फैसले को लेकर शहर में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे पुलिस का नवाचार और आधुनिक सोच बता रहे हैं। वहीं कुछ इसे पारंपरिक ट्रेनिंग से हटकर एक प्रयोग मान रहे हैं, जिसकी उपयोगिता पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। विशेष बात यह भी है कि इस आयोजन के जरिए पुलिस विभाग ने अप्रत्यक्ष रूप से जनता तक जीरो टॉलरेंस का संदेश पहुंचाने की कोशिश की है, यानी अपराध के खिलाफ सख्त रुख और कानून का सख्ती से पालन।

दरोगा सर्विंद और महिला दरोगा अनु ने बताया कि मूवी काफी अच्छी है, लेकिन पूरी मूवी देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। एक अन्य दरोगा ने ऑफ कैमरा बताया कि मनोरंजन के रूप में तो सही है, लेकिन हकीकत में पुलिस महकमे के लिए काफी कुछ सीखने वाली फिल्म है। शायद कप्तान साहब ने आज के हालातों को देखते हुए नए बैच को ये मूवी दिखाई है जो सराहनीय है।

 

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