Shala Praveshotsav : शाला प्रवेशोत्सव से पहले शिक्षा व्यवस्था की पोल…! कोरबा के 120 स्कूलों में अंधेरा…400 स्कूलों में ‘जुगाड़’ की बिजली

News Power Zone
3 Min Read
Shala Praveshotsav

कोरबा, 16 जून। Shala Praveshotsav : एक ओर शिक्षा विभाग नए सत्र के स्वागत और शाला प्रवेशोत्सव को लेकर तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर जिले के सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत सरकारी दावों की पोल खोल रही है। जिले के 120 से अधिक स्कूल ऐसे हैं जहां आज भी बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी है। इसके अलावा 400 से ज्यादा स्कूल अस्थायी बिजली कनेक्शन के भरोसे संचालित हो रहे हैं।

गर्मी और उमस के इस मौसम में बच्चों को बिना बिजली के कक्षाओं में बैठना पड़ सकता है। कई स्कूलों में पंखे तक नहीं चल पा रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ड्रॉपआउट बच्चों का भी नहीं है स्पष्ट आंकड़ा

शाला प्रवेशोत्सव का उद्देश्य हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना है, लेकिन जमीनी स्तर पर शाला त्यागी बच्चों की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी का अभाव दिखाई देता है। स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान और पुनः नामांकन की प्रक्रिया अपेक्षित गति से नहीं चल पा रही है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आज भी कई बच्चे मजदूरी, घरेलू कामकाज और अन्य गतिविधियों में लगे हुए हैं, जिससे शिक्षा के अधिकार और शत-प्रतिशत नामांकन के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।

कोरबा के स्कूलों की स्थिति

प्राथमिक स्कूल

  • कुल स्कूल: 1,526
  • मरम्मत की जरूरत: 521
  • टीन/खपरैल छत वाले स्कूल: 234

मिडिल स्कूल

  • कुल स्कूल: 513
  • जर्जर स्कूल: 156

हाईस्कूल

  • कुल स्कूल: 293
  • मरम्मत योग्य स्कूल: 83

बिजली व्यवस्था

  • 120+ स्कूलों में बिजली नहीं
  • 400+ स्कूल अस्थायी कनेक्शन पर निर्भर

टीन-खपरैल की छतों में पढ़ने को मजबूर बच्चे

जिले में आज भी सैकड़ों स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों को टीन और खपरैल की छतों के नीचे पढ़ाई करनी पड़ रही है। गर्मी और बरसात दोनों मौसमों में ये भवन विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। कई जगह भवनों की स्थिति इतनी खराब है कि सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

अस्थायी बिजली कनेक्शन बना जोखिम

400 से अधिक स्कूलों में स्थायी बिजली कनेक्शन नहीं होने के कारण अस्थायी व्यवस्था के सहारे शिक्षण कार्य चलाया जा रहा है। इससे बिजली आपूर्ति बाधित होने के साथ-साथ तकनीकी और सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बने रहते हैं।

उठ रहे हैं बड़े सवाल

शाला प्रवेशोत्सव से पहले स्कूलों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है। शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि नए सत्र के पहले इन समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

Share This Article