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SECL में सुरक्षा पर बड़ा सवाल…! 30 खान हादसों में 40 श्रमिकों की मौत…कोल इंडिया बैठक में अख्तर जावेद उस्मानी का बड़ा हमला

PPE और SOP की अनदेखी का आरोप


मनेन्द्रगढ़/कोलकाता, 31 जुलाई। SECL समेत देशभर की कोयला खदानों में लगातार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कोल इंडिया लिमिटेड की त्रिपक्षीय बैठक में हिंद मजदूर सभा के राष्ट्रीय प्रतिनिधि एवं श्रमिक नेता अख्तर जावेद उस्मानी ने एसईसीएल की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया कि पिछले एक वर्ष में 30 प्राणघातक खान दुर्घटनाओं में 40 श्रमिकों की मौत हो चुकी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

उस्मानी ने कहा कि कई खदानों में सुरक्षा नियम केवल कागजों तक सीमित हैं। उन्होंने प्रत्येक दुर्घटना की निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

बैठक में उठे SECL की कई परियोजनाओं के मुद्दे

बैठक में दीपिका माइंस, कुसमुंडा परियोजना और सोहागपुर क्षेत्र से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाया गया।

कुसमुंडा परियोजना में कम चौड़ाई वाले हॉल रोड पर भारी डंपरों के संचालन को गंभीर लापरवाही बताया गया। उस्मानी के अनुसार, इसी कारण श्रमिक सत्यनारायण की जान गई।

दीपिका माइंस दुर्घटना में इंडियन ऑयल कंपनी के श्रमिक के लिए मुआवजा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी एसईसीएल पर तय करने की मांग की गई।

सोहागपुर क्षेत्र में 6 नवंबर 2025 की विद्युत दुर्घटना में ठेकेदार पर घटना छिपाने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और पीड़ित को उचित मुआवजा देने की मांग रखी गई।

PPE और SOP की अनदेखी का आरोप

उस्मानी ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर श्रमिकों से बिना PPE (Personal Protective Equipment) और बिना SOP (Standard Operating Procedure) के काम कराया जा रहा है। उन्होंने ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कठोर कार्रवाई की मांग की।

साथ ही उन्होंने एसडीएल और एलएचडी ऑपरेटरों के लिए हर घंटे के बाद 15 मिनट का विश्राम, गुणवत्तापूर्ण हेलमेट, गमबूट और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने तथा इलेक्ट्रिशियनों की कमी को सीधी भर्ती से पूरा करने की मांग भी उठाई।

25 प्रमुख मुद्दों पर मांगा जवाब

बैठक में श्रमिक नेता ने कुल 25 सुरक्षा संबंधी मुद्दे उठाए। इनमें माइन सेफ्टी ऑडिट, बायोमैट्रिक उपस्थिति, भूमिगत खदानों में वायरलेस संचार, मेन राइडिंग सिस्टम, शोर से प्रभावित श्रमिकों को मुआवजा, गुणवत्तापूर्ण स्पेयर पार्ट्स का उपयोग और अवैध उत्खनन रोकने जैसे विषय शामिल रहे।

बैठक के अंत में डीजीएमएस और कोल इंडिया प्रबंधन ने श्रमिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया। हालांकि श्रमिक संगठनों का कहना है कि अब आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव दिखना चाहिए।

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