रायपुर, 08 सितंबर। Sansad Nidhi : छत्तीसगढ़ के 11 लोकसभा क्षेत्रों में सांसद निधि से विकास कार्यों को मंजूरी तो मिली, लेकिन बड़ी संख्या में परियोजनाएं अब भी अधूरी हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक तीन वित्तीय वर्षों में 2,284 विकास कार्य स्वीकृत किए गए, जिनमें से सिर्फ 895 परियोजनाएं पूरी हो सकी हैं। वहीं 1,389 काम अभी लंबित हैं। यानी स्वीकृत परियोजनाओं में करीब 61 फीसदी काम पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।
लोकसभा सांसदों को अपने क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए हर साल 5 करोड़ रुपये की सांसद निधि उपलब्ध होती है। ऐसे में सवाल सिर्फ राशि मंजूर होने का नहीं, बल्कि स्वीकृत कार्यों के समय पर क्रियान्वयन और निगरानी का भी है।
हर सांसद को सालाना 5 करोड़ की निधि
सांसद निधि के तहत प्रत्येक लोकसभा सांसद को क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों के मुताबिक विकास कार्यों के लिए हर साल 5 करोड़ रुपये उपलब्ध होते हैं। यह राशि दो किस्तों में जारी की जाती है। सांसद अपने क्षेत्र की प्राथमिकताओं के आधार पर विभिन्न विकास परियोजनाओं की अनुशंसा करते हैं।
हालांकि किसी काम को मंजूरी मिलना प्रक्रिया का पहला चरण है। इसके बाद प्रशासनिक स्वीकृति, निर्माण एजेंसी, टेंडर, जमीन और अन्य स्थानीय प्रक्रियाओं के कारण परियोजना के पूरा होने में समय लग सकता है।
कमलेश जांगड़े के क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम पूरे
उपलब्ध आंकड़ों में कमलेश जांगड़े के लोकसभा क्षेत्र में 344 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 254 काम पूरे हो चुके हैं। स्वीकृत और पूर्ण परियोजनाओं के अनुपात में यह आंकड़ा कई अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर नजर आता है।
वहीं ज्योत्सना चरणदास महंत के क्षेत्र में 310 कार्य स्वीकृत हुए, जिनमें 136 पूरे हुए हैं। चिंतामणि महाराज के क्षेत्र में 330 कार्यों को मंजूरी मिली, लेकिन अब तक 70 परियोजनाएं ही पूरी हो सकी हैं।
रायपुर-दुर्ग में मंजूरी ज्यादा, पूर्णता कम
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के क्षेत्र में 164 कार्य स्वीकृत किए गए, जिनमें 38 पूरे हुए हैं। इसी तरह दुर्ग सांसद विजय बघेल के क्षेत्र में 218 परियोजनाओं को मंजूरी मिली और इनमें से 70 काम पूरे हुए हैं।
इन आंकड़ों से साफ है कि कई लोकसभा क्षेत्रों में मंजूर परियोजनाओं और पूरी हो चुकी परियोजनाओं के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। ऐसे में स्वीकृत कार्यों की प्रगति की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
भोजराज नाग के क्षेत्र में सबसे कम मंजूर काम
कांकेर सांसद भोजराज नाग के क्षेत्र में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 87 कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जो 11 लोकसभा क्षेत्रों में सबसे कम हैं। इनमें से 29 परियोजनाएं पूरी हुई हैं।
खर्च से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों में भी उनके क्षेत्र में सांसद निधि के उपयोग की स्थिति कई अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम दिखाई देती है। हालांकि खर्च के प्रतिशत की सटीक तुलना के लिए विभागीय मूल रिकॉर्ड से आंकड़ों का मिलान जरूरी होगा।
1,389 प्रोजेक्ट अधूरे, निगरानी पर सवाल
तीन वित्तीय वर्षों के आंकड़ों के अनुसार कुल 2,284 स्वीकृत कार्यों में 895 पूरे और 1,389 लंबित हैं। वहीं उपलब्ध जानकारी में बस्तर लोकसभा क्षेत्र में करीब 18.4 प्रतिशत और रायपुर में करीब 23.2 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने की बात सामने आती है।
सरगुजा के आंकड़ों में 212 प्रतिशत पूर्णता दर का उल्लेख है, जो स्वीकृत और पूर्ण कार्यों के सामान्य अनुपात से संभव नहीं है। इसलिए इस आंकड़े को डेटा या टाइपिंग त्रुटि की आशंका के चलते आधिकारिक रिकॉर्ड से सत्यापित करना जरूरी है।
सांसद निधि का मकसद स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों को गति देना है। ऐसे में 1,389 परियोजनाओं का लंबित रहना उनके क्रियान्वयन, निगरानी और समयबद्धता पर सवाल जरूर खड़ा करता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन लंबित कार्यों को कब तक पूरा किया जाता है और सांसद निधि से मंजूर परियोजनाओं की मॉनिटरिंग को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है।












