NTPC Korba Plant Electrical Fault: NTPC कोरबा की 7 यूनिट एक साथ ट्रिप… दो घंटे का अंधेरा और ₹100 करोड़ के नुकसान की चर्चा! कहीं निजीकरण की आहट तो नहीं?

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NTPC Korba Plant Electrical Fault: NTPC कोरबा में सर्किट ब्रेकर टेस्टिंग के दौरान इलेक्ट्रिकल फॉल्ट से 2600 MW की सभी 7 यूनिट ट्रिप हो गईं। घटना के बाद निजीकरण की चर्चाओं ने भी जोर पकड़ा।

कोरबा। NTPC Korba Plant Electrical Fault: देश के प्रमुख औद्योगिक बिजली उत्पादन केंद्रों में शामिल NTPC कोरबा में शुक्रवार को PGCIL बे के ब्रेकर की टेस्टिंग के दौरान हुए विद्युत फॉल्ट ने पावर सेक्टर में हलचल पैदा कर दी। एक तकनीकी फॉल्ट के बाद NTPC कोरबा की सातों यूनिटें एक साथ ट्रिप हो गईं। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा और करीब डेढ़ घंटे तक विद्युत व्यवस्था प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

यह घटना महज बिजली गुल होने तक सीमित नहीं है। NTPC कोरबा जैसे बड़े औद्योगिक बिजलीघर की सातों यूनिटों का एक साथ बंद होना उत्पादन, ग्रिड स्थिरता और संभावित आर्थिक नुकसान के लिहाज से गंभीर विषय माना जा रहा है।

एक टेस्टिंग और पूरा पावर स्टेशन ट्रिप!

NTPC कोरबा के जनसंपर्क अधिकारी सुश्री ऊष्मा घोष (PRO) के अनुसार, PGCIL द्वारा PGCIL बे के ब्रेकर की टेस्टिंग के दौरान विद्युत फॉल्ट हुआ। फॉल्ट के कारण NTPC कोरबा की सभी यूनिटें ट्रिप हो गईं।

घटना के बाद NTPC की तकनीकी टीम ने तत्काल यूनिटों को दोबारा रिवाइव करने की प्रक्रिया शुरू की। प्रबंधन के अनुसार यूनिटों को सामान्य स्थिति में लाने का काम जारी है और इसके देर रात तक पूरा होने की संभावना है।

औद्योगिक उत्पादन पर पड़ा सीधा असर

NTPC कोरबा की सातों यूनिटें बिजली उत्पादन की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। ऐसे में एक साथ सभी यूनिटों का ट्रिप होना केवल तकनीकी घटना नहीं, बल्कि पावर जनरेशन और औद्योगिक विद्युत आपूर्ति से जुड़ा बड़ा व्यवधान है।

दो घंटे तक उत्पादन प्रभावित रहने का मतलब है कि इस दौरान बिजली उत्पादन में बड़ी गिरावट आई होगी। इसका असर ग्रिड पर भी पड़ा होगा और वैकल्पिक स्रोतों से बिजली की भरपाई करनी पड़ी होगी। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव कितना रहा, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

₹100 करोड़ का आंकड़ा कहां से आया?

सातों यूनिटों के एक साथ ट्रिप होने के बाद करीब ₹100 करोड़ के संभावित आर्थिक नुकसान की चर्चा है। हालांकि यह आंकड़ा अभी आधिकारिक नुकसान का आंकड़ा नहीं है।

वास्तविक आर्थिक नुकसान का आकलन कई बिंदुओं पर निर्भर करेगा, जिसमें उत्पादन हानि, यूनिटों के बंद रहने की अवधि, ग्रिड से संबंधित प्रभाव और यूनिटों को दोबारा सामान्य स्थिति में लाने की प्रक्रिया शामिल है।
इसलिए ₹100 करोड़ के आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

अब सबसे बड़ा सवाल: टेस्टिंग में चूक कहां हुई?

औद्योगिक बिजली संयंत्रों में किसी भी बड़े इलेक्ट्रिकल सिस्टम की टेस्टिंग निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत की जाती है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि PGCIL बे के ब्रेकर की टेस्टिंग के दौरान ऐसा कौन सा फॉल्ट हुआ, जिससे एक साथ सातों यूनिटें ट्रिप कर गईं?

0क्या टेस्टिंग से पहले सभी सुरक्षा और बैकअप व्यवस्थाओं की पर्याप्त जांच हुई थी?

0क्या फॉल्ट की स्थिति में यूनिटों को एक साथ ट्रिप होने से बचाने की कोई व्यवस्था थी?

0और क्या इस पूरी घटना की विस्तृत तकनीकी जांच होगी?

 

निजीकरण का सवाल क्यों उठा?

NTPC एक सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख बिजली उत्पादन कंपनी है। ऐसे में किसी बड़े उत्पादन केंद्र में लंबे समय तक उत्पादन प्रभावित होने की घटना स्वाभाविक रूप से कंपनी की कार्यक्षमता, उत्पादन लागत और वित्तीय प्रदर्शन को लेकर चर्चा पैदा करती है।

इसी पृष्ठभूमि में अब NTPC कोरबा की घटना को लेकर निजीकरण की संभावित दिशा पर भी सवाल उठने लगे हैं।

हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि इस घटना को NTPC के निजीकरण से जोड़ने वाला कोई आधिकारिक बयान या प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि यूनिटों का ट्रिप होना निजीकरण की किसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

फिर भी औद्योगिक क्षेत्र में यह सवाल चर्चा में जरूर है कि अगर किसी बड़े सार्वजनिक बिजलीघर में बार-बार उत्पादन बाधित होता है और इससे भारी आर्थिक नुकसान होता है, तो क्या भविष्य में उसकी कार्यक्षमता और संचालन व्यवस्था को लेकर बड़े फैसलों की जमीन तैयार हो सकती है?

क्या यह सिर्फ तकनीकी फॉल्ट था?

फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी इसे PGCIL बे के ब्रेकर की टेस्टिंग के दौरान हुआ विद्युत फॉल्ट बताती है। लेकिन सातों यूनिटों के एक साथ ट्रिप होने के कारण घटना की तकनीकी गंभीरता बढ़ जाती है।

यदि जांच में यह महज तकनीकी खराबी साबित होती है तो मामला वहीं खत्म हो जाएगा। लेकिन यदि सुरक्षा व्यवस्था, टेस्टिंग प्रक्रिया या संचालन में कोई गंभीर चूक सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करने का सवाल भी उठेगा।

स्क्रिप्ट’ या तकनीकी चूक? जांच से खुलेगा राज

0सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सातों यूनिट एक साथ क्यों ट्रिप हुईं?

0क्या यह सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण तकनीकी फॉल्ट था, टेस्टिंग प्रक्रिया में चूक थी या पावर सिस्टम में कोई ऐसी कमजोरी सामने आई जिसे पहले पहचाना नहीं गया?

0फिलहाल NTPC की तकनीकी टीम यूनिटों को रिवाइव करने में जुटी है। यूनिटों के पूरी तरह सामान्य होने, तकनीकी जांच और वास्तविक आर्थिक नुकसान का आकलन सामने आने के बाद ही इस घटना की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।फिलहाल सवाल कई हैं, जवाब तकनीकी जांच के इंतजार में हैं।

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