UN का ‘नया’ वर्ल्ड मैप! अब बड़ा दिखेगा अफ्रीका, यूरोप-अमेरिका का घटेगा आकार, 164 देशों ने दिया समर्थन

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नई दिल्ली, 05 सितंबर। UN : संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के नक्शे को लेकर एक अहम प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूरी दी है। टोगो की अगुवाई में लाए गए इस प्रस्ताव में पारंपरिक Mercator Projection से हटकर ऐसी मैप प्रोजेक्शन को बढ़ावा देने की बात कही गई है, जो महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल को ज्यादा सटीक तरीके से दिखाती है। प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया, जबकि 6 देश अनुपस्थित रहे और अमेरिका ने विरोध में वोट दिया।

क्यों बदला जा रहा है दुनिया का नक्शा?

मर्केटर प्रोजेक्शन 16वीं सदी में समुद्री नेविगेशन के लिए विकसित की गई थी। इसमें भूमध्य रेखा से दूर स्थित इलाकों का आकार वास्तविकता से काफी बड़ा दिखाई देता है। यही वजह है कि इस नक्शे पर ग्रीनलैंड लगभग अफ्रीका जितना बड़ा नजर आता है, जबकि वास्तविक क्षेत्रफल में अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है।

Equal Earth Projection को मिलेगा बढ़ावा

UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसी क्षेत्रफल के लिहाज से अधिक सटीक मैप प्रोजेक्शन को अपनाने की दिशा में प्रोत्साहन दिया गया है। इसके इस्तेमाल से अफ्रीका का आकार पहले की तुलना में काफी बड़ा नजर आएगा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे उत्तरी गोलार्ध के क्षेत्र अपेक्षाकृत छोटे दिखाई देंगे। हालांकि, यह फैसला मर्केटर मैप पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाता और समुद्री नेविगेशन में उसका इस्तेमाल जारी रह सकता है।

164 देशों का समर्थन, अमेरिका ने किया विरोध

टोगो द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को अफ्रीकी संघ का समर्थन मिला। मतदान में 164 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, छह देशों ने मतदान से दूरी बनाई और अमेरिका अकेला देश रहा जिसने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। अमेरिकी पक्ष ने इसे वैचारिक एजेंडे से जुड़ा मुद्दा बताया, जबकि समर्थकों ने इसे दुनिया के भौगोलिक स्वरूप को ज्यादा सही तरीके से प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना।

स्कूलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर असर

प्रस्ताव का उद्देश्य सिर्फ नक्शे का स्वरूप बदलना नहीं है, बल्कि शिक्षा, संस्थानों, मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दुनिया के भौगोलिक आकार को ज्यादा सटीक तरीके से प्रस्तुत करने को प्रोत्साहित करना है। टोगो ने अपने स्कूलों की भूगोल सामग्री को अपडेट करने की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही है। हालांकि UN का प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, इसलिए दुनिया भर में नक्शों का तत्काल एक जैसा बदलना जरूरी नहीं होगा।

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