
कटाक्ष: लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में इन दिनों एक ऐसे ‘सुपरह्यूमन‘ इंजीनियर साहब अवतरित हुए हैं, जिनकी कार्यशैली देखकर आधुनिक विज्ञान भी कोमा में चला जाए। आम इंसान तो एक वक्त पर एक ही जगह रह सकता है, लेकिन इन साहब का जलवा ऐसा है कि वे एक ही समय पर चार-चार जिलों के क्षितिज पर चमक रहे हैं। कागज़ों की दुनिया देखिए मूल पदस्थापना बिलासपुर में, अटैचमेंट जांजगीर में, महात्वाकांक्षी योजना का जिम्मा शक्ति में और अतिरिक्त प्रभार चौथे कोरबा जिले में! अब आम जनता पंचांग लेकर बैठी है कि साहब आज किस ग्रह (जिले) में गोचर कर रहे हैं।
विभाग की इस अगाध श्रद्धा को देखकर लगता है मानो उन्होंने एक अकेले अधिकारी में ही ‘चतुर्भुज भगवान’ की क्षमताएं तलाश ली हैं। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि जब साहब की आत्मा चार दिशाओं में बंटी हो, तो काम में ‘क्वालिटी’ आएगी या सिर्फ गाड़ी का ‘डीजल बिल’? क्या साहब सचमुच ‘टाइम ट्रैवल’ करके हर जगह प्रकट होते हैं, या फिर उनकी अनुपस्थिति में फाइलें खुद ही समझदार होकर दस्तखत कर लेती हैं?
विभाग का उन पर विश्वास भी कमाल का है। लगता है जैसे पूरी इंजीनियरिंग बिरादरी में योग्य अधिकारियों का अकाल पड़ गया हो और विभाग को चार जिलों का भाग्य एक ही कंधे पर टिका दिखाई दे रहा हो। ऐसा विश्वास तो शायद माता-पिता भी अपने होनहार बच्चों पर नहीं करते, जितना विभाग साहब पर कर रहा है।
दिलचस्प विरोधाभास यह भी है कि जहां एक तरफ कई योग्य और डिग्रीधारी इंजीनियर दफ्तरों में मक्खियां मार रहे हैं और काम मिलने की प्रतीक्षा में बूढ़े हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विभाग का ‘अंधविश्वास’ कुछ चुनिंदा कंधों पर इतना भारी है कि पूरा तंत्र उन्हीं के इर्द-गिर्द चक्कर काट रहा है। इससे तो यही संदेश जाता है कि विभाग में या तो अकाल पड़ा है, या फिर ‘सिटिंग-सेटिंग’ का खेल इतना तगड़ा है कि दूसरा कोई उस जादुई घेरे में एंट्री ही नहीं पा सकता।
‘सुशासन’ के इस अद्भुत और चमत्कारी मॉडल ने कम से कम इतना तो सिद्ध कर ही दिया है कि यहाँ एक अकेला अधिकारी चार जिलों का बोझ अपनी रीढ़ की हड्डी पर उठा सकता है और अंधा सिस्टम इसे ‘दक्षता’ मानकर ताली बजा सकता है। अब यह साहब की मजबूरी है, विभाग की लाचारी है या फिर मलाईदार विभागों को आपस में बांटने की कोई नई ‘इंजीनियरिंग’, इसका जवाब तो खुद विभाग के नियंता ही दे सकते हैं। तब तक जनता तो बस यही गा रही है “कण-कण में व्यापे हैं भगवान, और जिले-जिले में इंजीनियर साहब महान!”






