Korba Sand Smuggling कोरबा में मौसम खुलते ही रेत तस्करों का तांडव शुरू हो गया है। हसदेव नदी से बेखौफ रेत निकासी और अवैध परिवहन ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोरबा।Korba Sand Smuggling बारिश थमी और आसमान साफ हुआ नहीं कि दूरपा इलाके में रेत तस्करों के पहिए फिर दौड़ पड़े। हसदेव नदी का सीना चीरकर रेत निकालने का खेल एक बार फिर जोर पकड़ता नजर आ रहा है। दिन हो या रात, कथित तस्करों के वाहन नदी और उसके आसपास के इलाकों में बेखौफ दौड़ते दिख रहे हैं।

मौसम खराब होने के दौरान जिस रेत के अवैध कारोबार पर कुछ हद तक ब्रेक लगा था, मौसम खुलते ही वही कारोबार फिर रफ्तार पकड़ता दिखाई दे रहा है। नदी से रेत निकालकर उसे निर्माण कार्यों के लिए ऊंचे दामों पर खपाने का खेल लंबे समय से चर्चा में है।
हसदेव की धार पर भारी पड़ रहा लालच
दूरपा क्षेत्र में हसदेव नदी के किनारे हालात ऐसे हैं कि यदि समय रहते निगरानी और कार्रवाई नहीं हुई तो नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर इसका असर पड़ सकता है। मशीनों और वाहनों के जरिए बड़े पैमाने पर रेत निकाले जाने के आरोप स्थानीय स्तर पर लगातार उठते रहे हैं।
सवाल यह है कि जब रेत परिवहन और खनन पर विभागीय नियम-कायदे लागू हैं, तो फिर कथित तस्करों के वाहन आखिर किसकी नजर के सामने से गुजर रहे हैं? क्या जिम्मेदार विभाग को इसकी भनक नहीं है, या फिर कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है?
मौसम खुला, कारोबार खुल गया!
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में नदी में पानी बढ़ने से रेत का अवैध कारोबार कुछ समय के लिए सुस्त पड़ जाता है। लेकिन जैसे ही नदी का जलस्तर और रास्ते अनुकूल होते हैं, रेत निकालने और परिवहन का सिलसिला फिर शुरू हो जाता है।
अब देखना यह है कि हसदेव के सीने पर चल रहे इस कथित रेत कारोबार पर खनिज विभाग कब कार्रवाई करता है। फिलहाल सवाल सीधा है, नदी से रेत कौन निकाल रहा है और उसके पीछे किसका संरक्षण है?












