Korba Sampada : ये भी गजब है..! आरआई को संपदा का प्रभार, पर्दे के पीछे से अब कौन निभाएगा किरदार? निहारिका दुकान प्रकरण के आरोपों से फिर उठे सवाल

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Korba Sampada: नगर निगम कोरबा में 6 अफसर-कर्मचारियों की जिम्मेदारियां बदलीं। आरआई को संपदा शाखा का प्रभार मिलने पर निहारिका दुकान प्रकरण से जुड़े पुराने आरोपों के बीच उठे सवाल।

कोरबा। Korba Sampada :नगर पालिक निगम कोरबा में जिम्मेदारियों के फेरबदल का नया आदेश सामने आया है। छह अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। राजस्व, जलकर, संपत्तिकर, संपदा और जोन कार्यालयों में नई तैनाती की गई है। कागज पर यह प्रशासनिक फेरबदल है, लेकिन संपदा शाखा की जिम्मेदारी को लेकर निगम के गलियारों में सवालों की नई चर्चा जरूर शुरू हो गई है।

 

सबसे ज्यादा नजर संपदा शाखा पर है। कॉम्प्लेक्स और दुकानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों वाली इस शाखा में सहायक राजस्व निरीक्षक राम महतो को पदस्थ किया गया है। वहीं राजस्व उप निरीक्षक भावेश यादव को संपदा शाखा का सहायक नोडल बनाया गया है।

अब सवाल यह कि संपदा जैसी महत्वपूर्ण शाखा में आरआई स्तर के कर्मचारी को जिम्मेदारी देने के पीछे निगम का गणित क्या है? क्या यह महज सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था है या फिर इसके पीछे जिम्मेदारियों का कोई अलग समीकरण है?

निहारिका दुकान प्रकरण ने बढ़ाई उत्सुकता

संपदा शाखा की चर्चा इसलिए भी दिलचस्प हो गई है क्योंकि निहारिका से जुड़ी एक दुकान को लेकर पूर्व में गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं। आरोप लगाया गया था कि दुकान को कथित तौर पर एक ‘शेडो मालिक’ के जरिए बेचा जा चुका है

यही वजह है कि संपदा शाखा में नई जिम्मेदारियों के बाद लोग पूछ रहे हैं कि जहां दुकानों और निगम की संपत्तियों से जुड़े मामलों में पहले से सवाल उठते रहे हों, वहां नई व्यवस्था कितनी पारदर्शी होगी?

कागज पर नोडल, मैदान में कौन?

आदेश में व्यवस्था स्पष्ट है। संबंधित कर्मचारी संपदा शाखा के नोडल अधिकारी के मार्गदर्शन में काम करेंगे। लेकिन सवाल यह है कि फाइल पर दर्ज जिम्मेदारी और जमीन पर होने वाले कामकाज में तालमेल कितना रहेगा?

कहीं ऐसा तो नहीं कि नाम किसी का, जिम्मेदारी किसी की और पर्दे के पीछे से कहानी कोई और लिखे?

फिलहाल यह महज सवाल है। किसी अधिकारी या कर्मचारी पर अनियमितता का आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन निगम की संपदा, दुकान और कॉम्प्लेक्स से जुड़े मामलों में पारदर्शिता का सवाल उठना स्वाभाविक है।

छह नाम, कई बदलाव… मगर निगाह संपदा पर

सुमीत गुप्ता को राजस्व एवं जलकर शाखा का सहायक नोडल, श्रीराम सिंह नेताम को संपत्तिकर शाखा का सहायक नोडल, अविनाश जायसवाल को कोसाबाड़ी जोन का उप जोन प्रभारी और उत्तम राठौर को पं. रविशंकर शुक्ल नगर जोन का उप जोन प्रभारी बनाया गया है। भावेश यादव और राम महतो को संपदा शाखा से जुड़ी जिम्मेदारियां मिली हैं।

यानी छह नाम और जिम्मेदारियों का बड़ा फेरबदल, लेकिन चर्चा का केंद्र फिलहाल संपदा शाखा ही बनी हुई है।

अब देखना होगा कि नई व्यवस्था में निगम की दुकानों और संपत्तियों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता कितनी बढ़ती है और फाइलें किस रफ्तार से आगे बढ़ती हैं।

क्योंकि सरकारी आदेश में नाम भले साफ लिखे हों, लेकिन निगम की संपदा की कहानी में असली किरदार कौन है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

 

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