
कोरबा। Saurabh Sagar Fly Ash Transport एनटीपीसी जमनीपाली से बिलासपुर के लिए फ्लाई ऐश लेकर रवाना हुई सौरभ सागर कंपनी की गाड़ी ने रास्ते में ही पूरा खेल बदल दिया। दस्तावेजों में गंतव्य बिलासपुर दर्ज था, लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि वाहन ने इंडस्ट्रियल एरिया में ही राख खाली कर दी। मामले का खुलासा होने के बाद छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, क्षेत्रीय कार्यालय कोरबा ने एनटीपीसी प्रबंधन पर ₹60 हजार की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) अधिरोपित कर दी है।
10 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार, फ्लाई ऐश परिवहन के दौरान IWMMS पोर्टल के निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। शिकायत मिलने पर 8 जुलाई को वाहन CG12 BR 1626 की जांच की गई। जांच में पाया गया कि वाहन का परिवहन रिकॉर्ड और वास्तविक गतिविधि में गंभीर विसंगति है। फ्लाई ऐश निर्धारित गंतव्य तक नहीं पहुंची, जिससे नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ अवैध डंपिंग और रिकॉर्ड में हेराफेरी की आशंका भी सामने आई।
पर्यावरण संरक्षण मंडल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि फ्लाई ऐश अधिसूचना-2021 और विभागीय निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर एनटीपीसी पर ₹60,000 का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया है तथा निर्धारित समय सीमा में राशि जमा कर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
IWMMS पोर्टल में बड़ा खेल?
सूत्रों का दावा है कि फ्लाई ऐश परिवहन के नाम पर कुछ ट्रांसपोर्टर और उनसे जुड़े लोग फर्जी पर्चियां, गलत गंतव्य और बीच रास्ते में राख उतारने जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे न केवल पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि राख के वास्तविक निस्तारण पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
‘स्थानीय युवा ब्रिगेड’ पर भी उठे सवाल
खबरीलाल के अनुसार, फ्लाई ऐश परिवहन में कथित फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह को कुछ स्थानीय युवाओं का भी सहयोग प्राप्त है। आरोप है कि छुरी क्षेत्र के कुछ युवक अधिक कमाई के लालच में राख परिवहन से जुड़े दस्तावेजों में हेराफेरी, फर्जी पर्चियां तैयार कराने और राख को निर्धारित स्थान के बजाय आसपास के क्षेत्रों में खपाने का काम कर रहे हैं।
पहले भी सौरभ सागर कंपनी की गाड़ी पर हुई थी कार्रवाई
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी सौरभ सागर कंपनी की एक गाड़ी रायपुर के लिए फ्लाई ऐश लेकर रवाना हुई थी, लेकिन जांच में वह देलवाडीह स्थित फ्लाई ऐश ब्रिक्स प्लांट में राख खाली करते पकड़ी गई थी। उस मामले में भी पर्यावरण विभाग ने ₹1.20 लाख का जुर्माना लगाया था। लगातार दूसरी कार्रवाई के बाद फ्लाई ऐश परिवहन व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल…
बिलासपुर के लिए निकली राख इंडस्ट्रियल एरिया में कैसे खाली हुई?
क्या यह केवल ट्रांसपोर्टर की लापरवाही है या संगठित नेटवर्क का हिस्सा?
बार-बार एक ही कंपनी की गाड़ियों पर कार्रवाई होने के बावजूद निगरानी क्यों नहीं सुधरी?
क्या एनटीपीसी के जिम्मेदार अधिकारी परिवहन की प्रभावी मॉनिटरिंग कर रहे थे या पूरा सिस्टम केवल कागजों तक सीमित है?
पर्यावरण विभाग की कार्रवाई के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि मामला केवल ₹60 हजार के जुर्माने तक सीमित रहता है या फिर फ्लाई ऐश परिवहन से जुड़े पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाती है।






