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Korba Breaking : ‘5 लाख करोड़ का दावा, लेकिन कोरबा को क्या मिला?’ पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने वेदांता-बालको से मांगा विकास का हिसाब

कोरबा।Vedanta BALCO Korba Development  वेदांता-बालको के हालिया विज्ञापन अभियान, जिसमें कंपनी समूह ने पिछले 10 वर्षों में सरकार के खजाने में 5 लाख करोड़ रुपये के योगदान का दावा किया है, अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। इस दावे पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा है कि कर चुकाना किसी कंपनी का एहसान नहीं, बल्कि कानून के तहत उसकी अनिवार्य जिम्मेदारी है।

प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन्होंने कहा कि आयकर, जीएसटी, रॉयल्टी, सीमा शुल्क और अन्य करों का भुगतान हर उद्योग की वैधानिक बाध्यता है। इसे सामाजिक योगदान या परोपकार के रूप में प्रचारित करना जनता के बीच गलत संदेश देने जैसा है।
“कोरबा की कीमत पर समृद्धि, लेकिन कोरबा को क्या मिला?”

जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि कंपनी ने सरकार को कितना कर दिया, बल्कि यह है कि जिस कोरबा की खदानों, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से हजारों करोड़ रुपये का कारोबार खड़ा हुआ, उस कोरबा को बदले में क्या मिला?

उन्होंने कहा कि आज भी कोरबा प्रदूषण, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, स्थानीय युवाओं के सीमित रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, खेल सुविधाओं और आधारभूत विकास जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में कंपनी के सामाजिक योगदान के दावों की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हॉकी का अधूरा वादा फिर चर्चा में

पूर्व मंत्री ने याद दिलाया कि वेदांता-बालको ने कोरबा में हॉकी खेल को बढ़ावा देने, हॉकी को गोद लेने और अंतरराष्ट्रीय स्तर का एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान बनाने का सार्वजनिक वादा किया था। लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद यह परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी। इसका नुकसान जिले के उन खिलाड़ियों को उठाना पड़ रहा है, जो बेहतर सुविधाओं के अभाव में अपनी प्रतिभा निखारने से वंचित हैं।

आईटी कॉलेज का मुद्दा भी उठाया

उन्होंने कहा कि आईटी कॉलेज की स्थापना के समय भी कंपनी ने आर्थिक सहयोग का भरोसा दिलाया था, लेकिन अपेक्षित सहायता नहीं मिलने से कॉलेज का संचालन प्रभावित हो रहा है। स्थिति ऐसी बन गई है कि संस्था का भविष्य ही संकट में दिखाई दे रहा है और हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

विज्ञापन नहीं, व्हाइट पेपर जारी करे कंपनी’

जयसिंह अग्रवाल ने वेदांता-बालको से मांग की कि यदि कंपनी अपने दावों को लेकर गंभीर है तो वह कोरबा की जनता के सामने सार्वजनिक व्हाइट पेपर जारी करे और बताए।

 

पिछले 10 वर्षों में कोरबा से कितना लाभ अर्जित किया गया।

जिले के विकास पर वास्तविक निवेश कितना हुआ।
स्थानीय युवाओं को कितने स्थायी रोजगार दिए गए।
प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण पर क्या ठोस कार्य हुए।

CSR की राशि किन योजनाओं पर और कितनी पारदर्शिता के साथ खर्च की गई।

हॉकी स्टेडियम और आईटी कॉलेज से जुड़े वादे अब तक क्यों अधूरे हैं।

जनता अब प्रचार नहीं, परिणाम देखेगी”

पूर्व मंत्री ने कहा कि करोड़ों रुपये विज्ञापन पर खर्च करने से बेहतर है कि कंपनी अपने अधूरे वादे पूरे करे। अब जनता विज्ञापनों से प्रभावित नहीं होगी, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले विकास कार्यों के आधार पर ही किसी कंपनी का मूल्यांकन करेगी।
उन्होंने कहा, “कर देना कानूनी दायित्व है, लेकिन जिस क्षेत्र से उद्योग अपनी समृद्धि हासिल करता है, उसके विकास में भागीदारी निभाना उसकी नैतिक जिम्मेदारी भी है। कोरबा की जनता को प्रचार नहीं, विकास का वास्तविक हिसाब चाहिए।”

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