Korba : वसीयत नामा, रजिस्टर्ड एग्रीमेंट और पॉवर ऑफ अटॉर्नी पर भी रोक… उप पंजीयक की मनमानी से लोग परेशान
उप पंजीयक की मनमानी से लोग परेशान
कोरबा, 02 सितंबर। Korba : विकासखंड के 25 से 30 गांवों की जमीन की रजिस्ट्री पर लगी रोक किसानों के लिए दोहरी मुसीबत बन गई है। न वसीयत नामा बन रहा, न पॉवर ऑफ अटॉर्नी। उप पंजीयक कार्यालय की मनमानी से लोग परेशान हैं।
कहावत है कि दूध का जला दही भी फूंक-फूंककर पीता है। ठीक वही हाल इस दफ्तर का है। कोरबा से कटघोरा फोरलेन सड़क निर्माण के लिए पिछले साल नवंबर 2024 से लगभग 30 गांवों की जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगी हुई है।
समस्या यह है कि अधिग्रहण वाली जमीन के अलावा किसानों की दूसरी जमीनों पर भी रजिस्टर्ड एग्रीमेंट नहीं हो पा रहे। नतीजा यह कि लोग न अपनी जमीन बेच पा रहे, न खरीद पा रहे। जरूरी दस्तावेज़ बनवाने में भी दिक्कत खड़ी हो गई है।
नियम न कायदा, सिर्फ फायदा…
जिला उप पंजीयक कार्यालय की कार्यप्रणाली पर किसानों का गुस्सा अब तंज में बदल गया है। लोग कह रहे हैं—यहां रजिस्ट्री कानून और नियम से नहीं, फायदे से होती है।
गांवों में चर्चा है कि हर रजिस्ट्री के लिए तय शुक्राना देना अनिवार्य है। बिना इसके फाइल आगे बढ़ना मुश्किल है। किसान चुटकी लेते हैं—“किताब में लिखा है कानून, मगर दफ्तर में वही चलता है जो जेब से निकले।”
अब हाल यह है कि लोग जमीन का सौदा करने से पहले कहते हैं—“पहले बाबू की जेब भरो, तभी कागज पर मुहर लगेगी।”



