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Korba : सत्ता की छतरी’में एरिगेशन में 26 साल की नौकरी.. “सैयां भय कोतवाल तो डर काहे का…”

कोरबा ।Job Controversy सरकारी तंत्र में एक पुरानी कहावत है “सैंया भये कोतवाल, तो डर काहे का।” सिंचाई विभाग में पदस्थ एक रसूखदार अधिकारी पर यह पंक्ति पूरी तरह सटीक बैठती है। 26 साल की सरकारी नौकरी में विभाग बदले, सरकारें बदलीं, मंत्री बदले, नियम बदले.. मगर साहब की कुर्सी का भूगोल नहीं बदला। तबादले की आंधियां आती रहीं, लेकिन उनकी टेबल पर रखा नेमप्लेट तक नहीं हिला।

 

विभागीय गलियारों और ठेकेदारों की ‘चंडाल चौकड़ी’ के बीच यह चर्चा आम है कि साहब को सूबे के रसूखदार राजनीतिक व्यक्तित्व का संरक्षण प्राप्त है। चर्चा तो यहाँ तक है कि साहब के रिश्तेदारी के तार सीधे सत्ता के शीर्ष से जुड़े हैं। यही कारण है कि राजनीति की यह ‘छाया’ उनके करियर के लिए सुरक्षा कवच बनी हुई है। सरकारी नौकरी में स्थानांतरण और पदोन्नति एक तय प्रक्रिया है, लेकिन यहाँ नियम बौने नजर आते हैं। कोरबा सिंचाई विभाग में सब-इंजीनियर के रूप में करियर शुरू करने वाले ये साहब पहले एसडीओ बने और अब ईई की रसूखदार कुर्सी संभाल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो पिछले दो दशकों में कई बार उनके तबादले और विभागीय जांच  हुए, लेकिन हर बार ‘ऊपर’ के एक फोन ने आदेश की फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

चर्चा तो यही है कि सिंचाई विभाग में साहब सिर्फ अधिकारी नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता “सिस्टम” बन चुके हैं। उनकी कुर्सी अब पद नहीं, परंपरा बन गई है। कर्मचारी बदलते हैं, सरकारें बदलती हैं, फाइलें बदलती हैं, लेकिन साहब वहीं के वहीं हैं, मानो विभागीय नक्शे में उनका नाम स्थायी संपत्ति के रूप में दर्ज हो चुका हो।

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