
थानेदार ने ली राहत की सांस..
ऊर्जाधानी के एक थानेदार ने आखिरकार चैन की सांस ली है वह भी ऐसी कि अब हर सांस में “मनी की धूनी” और “कोयले की महक” घुल गई है।
उनके “कमाल” को देखकर लोग कहने लगे है “कम हाइट वाले साहब ने बड़ा काम कर दिया… भले ही नाम बदनाम हुआ, पर धोती फाड़कर रुमाल कर दिया।”
मामला हाई प्रोफाइल कोल लिफ्टर हत्या से जुड़ा है। इस केस में फरार चल रहे वीआईपी आरोपी और एसईसीएल के एजीएम साहब की किस्मत आखिरकार चमक गई। करोड़पति आरोपियों पर पुलिस की मेहरबानी ऐसे रही कि गिरफ्तारी के बढ़ते दबाव के बावजूद भी एजीएम को लगातार ढील मिलती रही।
सूत्रों का कहना है कि थाने में इस पूरे प्रकरण की “मनी ट्रेल” नहीं, बल्कि “प्रोटेक्शन टेल” चली थी। कोर्ट की फटकार, मीडिया की सुर्खियाँ, और जनता के सवाल सब धरे के धरे परे रह गए। कानून के हाथ तो लंबे हैं, लेकिन इस केस में शायद थानेदार के हाथ पाकिट में धंसे हुए थे।
अब जब एजीएम साहब को जमानत मिल गई, तो थानेदार ने भी चैन की सांस ली। कहा जा रहा है कि अब साहब खुद कोयले के धंधे में हाथ आजमाने की सोच रहे हैं। जनता बस मुस्कुराकर कह रही है “वाह साब जी, आपने तो कमाल कर दिया… धोती फाड़कर रुमाल कर दिया!”
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अब तो बंगले से फोन आने लगे हैं..!
नगर निगम में इन दिनों कुछ नए किस्म का विकास देखने को मिल रहा है। फिल्म ‘दूर गगन की छांव में’ का मशहूर गीत “कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन” नगर निगम के ठेकेदारों की जुबान पर चढ़ा है। वजह भी खास है पहले जहां कमीशन के लिए कोई फोर्स नहीं करता था, अब सीधे बंगले से फोन घनघना रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि निगम में बिल पास होने के बाद ठेकेदारों को तयशुदा ‘हिसाब’ के लिए अब ऊंचे बंगले से कॉल आने लगे हैं। पुराने दिनों की सहज व्यवस्था को याद करते हुए कई ठेकेदार उस दौर को “सुनहरा” बताते हैं, जब एक ईमानदार आयुक्त के चलते कमीशन का नाम लेना भी गुनाह समझा जाता था। वही ठेकेदार अब सरकार बदलने के साथ सिस्टम बदलने की बात करते हुए कहते हैं “अब काम के पहले दाम… और एडीजे की डिमांड अलग!”
नगर निगम के गलियारों में चर्चा है कि ठेकेदार अब आपस में खुसुर-फुसुर करते हुए कहते नजर आते हैं “क्या जमाना आ गया है भाई, अब तो कमीशन के लिए भी तकाजा!”
कहते हैं, “बदलाव ही जीवन का नियम है।” शायद यही कारण है कि ‘भुगतान से पहले चढ़ावा’ जैसी नई परंपरा भी जल्द शुरू होने वाली है और इसे भी “प्रशासनिक नवाचार” कहा जाएगा!
वैसे, सरकार का नारा है “सबका साथ, सबका विकास” तो ऐसे में बंगले से फोन आना भी तो विकास का ही हिस्सा है…!
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बाइक में राख, ट्रांसपोर्टर बने उस्ताद…
“जली को आग और बुझी को राख कहते हैं, और इस राख को जो बाइक में बैठाकर ट्रक का बिल बनवा ले, उसे उस्ताद कहते हैं।” यह डायलॉग किसी फिल्म का नहीं, बल्कि राख परिवहन में नए खेल का निचोड़ है।
कहते हैं चोर चोरी छोड़ दे, पर हेराफेरी नहीं। यह पंक्ति इन दिनों सीएसईबी की राखड़ ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टरों पर फिट बैठती है। पर्यावरण विभाग ने राख चोरी और गलत डंपिंग रोकने के लिए ट्रकों में जीपीएस लगाना अनिवार्य किया। लगा कि अब ईमानदारी की राह पर ट्रक दौड़ेंगे। पर ट्रांसपोर्टरों ने सिस्टम को ऐसा गोल चक्कर घुमाया कि क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी का जीपीएस भी चकरा गया।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रक को डंपिंग साइट तक न ले जाकर ये लोग जीपीएस डिवाइस को बाइक में लगाकर वहीं तक घुमा देते हैं। सिस्टम को लगता है कि राख सही जगह पहुंच गई, जबकि हकीकत में राख हिलती भी नहीं। इस तकनीकी जुगाड़ ने पर्यावरण विभाग और निगरानी एजेंसियों को पूरी तरह चकमा दे दिया है।
राख को कोकीन समझकर उसकी कीमत वसूलने वाले कुछ ठेकेदार और अफसरों की मिलीभगत से यह खेल बेखौफ चल रहा है। कहा तो यह भी रहा है कि सीएसईबी के राखड़ डैम से बिना राख निकाले ही फर्जी पर्चियां काटी जा रही हैं। तभी तो डैम में अब राख भरने की जगह नहीं बची, लेकिन कागजों में ढुलाई जारी है।
जनमानस अब तंज कसते हुए कहने लगा है “जली को आग, बुझी को राख, और बाइक में जीपीएस लगाकर ट्रक का बिल बना ले, उसे उस्ताद कहते हैं।”
उस्तादों ने वैसे साबित कर दिया है कि जहां दिमाग से ट्रेलर चलता है, वहां असली ट्रेलर की क्या ज़रूरत..!
वीआईपी और आईपीएस
छत्तीसगढ़ में नवंबर का महीना वीआईपी दौरे की वजह से आईपीएस लॉबी के लिए परेशानी के साथ राहत लेकर आया है। 1 नंवबर को पीएम के दौरा के बाद उपराष्ट्रपति और अब 20 नवंबर को राष्ट्रपति का सरगुजा दौरा होने वाला है। इसी महीने की आखिर में डीजी कांफ्रेस में पीएम और गृहमंत्री अमित शाह रायपुर आने वाले हैं। यानि आईपीएस के लिए पूरा महीना भाग दौड़ वाला रहने वाला है।
जाहिर है ऐसे भाग दौड़ वाले माहौल में आईपीएस अफसरों का तबादला कर के सरकार कोई जहमत नहीं उठाएगी। खबरीलाल की माने तो 1 नवंबर से सरकार पुलिस कमिशनर प्रणाली लागू करने की पूरी तैयारी में थी। मगर इसके लिए पुलिस मुख्यालय में अफसरों का फेरबदल जरूरी हो गया था। लेकिन, लगातार वीआईपी दौरे की वजह से मामला अभी टल गया है और आईपीएस अफसरों को राहत मिल गई।
खबरीलाल की माने तो ये राहत ज्यादा दिन नहीं चलने वाली। असल में पुलिस हेडक्वार्टर में रापुसे और आईपीएस अफसरों की फेरबदल वाली फाइल तेजी से चल रही है। कई जिलों में डीएसपी और एसपी बदले जाएंगे। सूत्रों की माने तो नए साल से पहले आईपीएस अफसरों के तबादले की सूची कभी भी जारी हो सकती है।
बृहस्पति किस पर भारी
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान पूरा होने से पहले ही विवादों में उलझ गया, और इसकी शुरुआत सरगुजा से हुई, जहां कांग्रेस से निष्कासित पार्टी के पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने कांग्रेस की विचारधारा, रुपयों का बोलबाला और डीसीसी में नियुक्ति में पैसों के लेनदेन जैसी बात उठाकर पार्टी को परेशानी में डाल दिया।
हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब बृहस्पति के बयानों ने कांग्रेस की परेशानी बढ़ाई हो..उनका पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव के साथ विवाद पहले भी सुर्खियों में रहा..यहां तक की दोनों नेताओं का विवाद विधानसभा तक पहुंचा । लेकिन, क्या बृहस्पति का ये आरोप केवल सरगुजा सीमित है ऐसा नहीं है।
खबरीलाल की माने तो बृहस्पति के इस बयान पर अभी तक किसी बड़े नेता की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। हां ये जरूर है कि पार्टी प्रवक्ता इसे कांग्रेस की छबि खराब करने की साजिश बताकर चुप हो गए। बीजेपी को भी बैठे बैठाए कांग्रेस पर तंज कसने का मौका मिला सो अलग। कांग्रेस की परेशानी ये है कि वो पार्टी से निष्कासित है इसलिए कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं हो सकती है, मगर इस मामले में बड़े नेताओं की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।




