कोरबा।Korba Nagar Nigam Tender Controversy ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे भले कागज़ों में चमक रहे हों, लेकिन कोरबा नगर निगम की ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। शहर में बनने जा रहे गौरव पथ फोर लेन बी.टी. रोड के टेंडर ने निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं अफसर धृतराष्ट्र बन गए हैं और अब ठेकेदारी भी “चहेतों” के हवाले करने की तैयारी है।
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Korba Nagar Nigam Tenderदरअसल, सीएसईबी चौक से जैन चौक, आईटीआई चौक होते हुए कोसाबाड़ी चौक तक बनने वाली इस सड़क परियोजना के लिए करीब 3356.30 लाख रुपये की ऑनलाइन निविदा जारी की गई है। कागज़ों में यह शहर के विकास की बड़ी पहल है, लेकिन टेंडर की शर्तें पढ़ते ही पूरा खेल समझ में आने लगता है।
निगम ने निविदा में ऐसा ‘स्पेशल क्लॉज’ जोड़ा है, जिसने अनुभवी और योग्य ठेकेदारों की राह लगभग बंद कर दी है। शर्त यह रखी गई है कि टेंडर में भाग लेने वाले ठेकेदार के पास स्ट्रीट लाइट, डिवाइडर और पथवे निर्माण का अनुभव अनिवार्य होगा। सवाल यह उठ रहा है कि सड़क निर्माण के टेंडर में ऐसी शर्तें क्यों जोड़ी गईं, जो चुनिंदा लोगों को ही पात्र बनाती हैं?
जानकार बताते हैं कि शासन के नियमों के अनुसार ए-क्लास ठेकेदारों को ऐसे कार्यों में भाग लेने की पात्रता होती है। लेकिन निगम की इस “कस्टमाइज्ड” शर्तों वाली निविदा ने कई योग्य ठेकेदारों को बाहर कर दिया है। आरोप यह भी है कि ये शर्तें पहले से तय ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए गढ़ी गई हैं, ताकि प्रतिस्पर्धा सीमित रहे और काम ‘सेटिंग’ के जरिए तय हो सके।
शहर में अब चर्चा यह है कि विकास के नाम पर टेंडर की स्क्रिप्ट पहले ही लिखी जा चुकी है, और पूरी प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है क्या निगम प्रशासन पारदर्शिता साबित करेगा या फिर ‘चमचों की ठेकेदारी’ का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?




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