रायपुर, 15 जुलाई। Critical Minerals : वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), रक्षा और हाईटेक उद्योगों की बढ़ती मांग के बीच क्रिटिकल और रेयर मिनरल्स नई अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। राष्ट्रीय खनिज उत्पादन में 18 से 20 प्रतिशत योगदान देने वाला छत्तीसगढ़ अब इस क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। राज्य सरकार पारंपरिक खनन से आगे बढ़ते हुए वैज्ञानिक उत्खनन, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार, वैल्यू एडिशन और नए क्रिटिकल मिनरल्स की खोज पर फोकस कर रही है।
खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने बताया कि भविष्य क्रिटिकल और रेयर मिनरल्स का है। इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। प्रदेश की भूगर्भीय संरचना इन खनिजों के लिए बेहद अनुकूल है और नए क्षेत्रों की पहचान के लिए व्यापक सर्वेक्षण चल रहा है।
उन्होंने बताया कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) के सहयोग से एक्सप्लोरेशन का बड़ा अभियान संचालित किया जा रहा है। वर्तमान में चल रहे सर्वे का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा क्रिटिकल मिनरल्स की खोज पर केंद्रित है। उम्मीद है कि अगले एक से दो वर्षों में कई नए ब्लॉकों में खनन शुरू हो जाएगा।
वैश्विक सप्लाई चेन में मिलेगी बड़ी भूमिका
पी. दयानंद के अनुसार यदि अनुमान के अनुरूप भंडार मिलते हैं, तो छत्तीसगढ़ न केवल देश की जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भी महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है।
पर्यावरण से नहीं होगा समझौता
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी खनन परियोजनाएं वैज्ञानिक और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप संचालित होंगी। प्राकृतिक संतुलन, स्थानीय समुदायों के हित और रोजगार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
निवेश और रोजगार पर बड़ा फोकस
सरकार का कहना है कि पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति के तहत प्रभावित परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास के बाद ही परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। राज्य में उपलब्ध 28 प्रमुख खनिजों के आधार पर नए निवेश आकर्षित करने और पारदर्शी आवंटन के जरिए दीर्घकालिक औद्योगिक विकास को गति देने की तैयारी है।












