अंबिकापुर, 24 जून। Corruption Case : लंबे समय से चर्चाओं में रहे फर्नीचर खरीदी घोटाले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। करीब 15 साल पुराने इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए संबंधित कार्यालय पहुंचकर कई अहम दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए हैं। जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों के आधार पर खरीदी प्रक्रिया, भुगतान और वास्तविक आपूर्ति के बीच हुए कथित अंतर की विस्तृत पड़ताल करेगी। एसीबी की इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है।
राजीव गांधी शिक्षा मिशन कार्यालय में एसीबी की दबिश
बुधवार को एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम अंबिकापुर स्थित कलेक्टोरेट कंपोजिट बिल्डिंग में संचालित राजीव गांधी शिक्षा मिशन कार्यालय पहुंची। डीएसपी प्रमोद कुमार खेस के नेतृत्व में पहुंची टीम ने फर्नीचर खरीदी और भुगतान से जुड़े विभिन्न दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया। जांच के दौरान कागजी रिकॉर्ड के साथ-साथ डिजिटल दस्तावेजों की भी जांच की गई। बताया जा रहा है कि आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण टीम को सीधे कार्यालय पहुंचकर कार्रवाई करनी पड़ी।
ईओडब्ल्यू से एसीबी को सौंपी गई जांच
फर्नीचर खरीदी से जुड़ा यह मामला पहले आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) के पास था। अब इस प्रकरण की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंप दी गई है। जांच एजेंसी बदलने के बाद मामले में कार्रवाई तेज हुई है और पुराने रिकॉर्डों का दोबारा परीक्षण शुरू किया गया है।
करोड़ों रुपये की खरीदी पर उठे थे सवाल
वर्ष 2011-12 में अविभाजित सरगुजा जिले में राजीव गांधी शिक्षा मिशन के माध्यम से बड़े पैमाने पर फर्नीचर खरीदी की गई थी। करीब 12 अलग-अलग फर्मों से करोड़ों रुपये मूल्य का फर्नीचर खरीदे जाने का दावा किया गया था। बाद में इस पूरी प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितताओं और खरीदी नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद जांच शुरू की गई थी।
स्कूलों तक नहीं पहुंचा सामान, फिर भी हुआ भुगतान
प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। आरोप था कि अनेक स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों तक फर्नीचर पहुंचा ही नहीं, लेकिन संबंधित फर्मों को पूरा भुगतान कर दिया गया। कई मामलों में रिकॉर्ड में दर्शाई गई सामग्री और वास्तविक आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पाया गया था। इसी आधार पर मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता के रूप में देखा गया।
दबाव में हस्ताक्षर कराने के भी लगे आरोप
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि कुछ संस्थानों के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों से दबाव बनाकर प्राप्ति रसीदों पर हस्ताक्षर कराए गए। कई जगहों पर कम मात्रा में फर्नीचर पहुंचने के बावजूद दस्तावेजों में पूर्ण आपूर्ति दर्शाकर भुगतान जारी कर दिया गया था। इन आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया था।
इस प्रकरण में तत्कालीन अधिकारियों और संबंधित फर्मों से जुड़े लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जानकारी के अनुसार करीब आधा दर्जन अधिकारियों और 12 फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। मामला वर्षों से जांच के विभिन्न चरणों में रहा है।
एसीबी अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। खरीदी आदेश, भुगतान रिकॉर्ड, भंडार पंजी और स्कूलों से प्राप्त पावती दस्तावेजों का मिलान कर पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ा जाएगा। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि दस्तावेजों के विश्लेषण से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे मामले की दिशा और स्पष्ट होगी।






