बिलासपुर, 23 अप्रैल। Coal Levy Case : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू और उनके परिजनों द्वारा दायर 9 अपीलों को खारिज कर दिया गया है।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि अपराध से अर्जित संपत्ति का सीधा पता नहीं चलता, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) समान मूल्य की अन्य संपत्तियों को भी अटैच कर सकता है।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अटैच की गई कई संपत्तियां वर्ष 2020 से पहले खरीदी गई थीं, जबकि कथित घोटाला उसके बाद शुरू हुआ। इसलिए इन संपत्तियों को अपराध से जोड़ना उचित नहीं है।
ईडी का दावा
ईडी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन के दौरान प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली का संगठित सिंडिकेट चल रहा था। आरोप है कि कोरबा और रायगढ़ में कलेक्टर रहते हुए रानू साहू ने इस नेटवर्क को संरक्षण दिया और करीब 5.52 करोड़ रुपये की अवैध राशि प्राप्त की, जिसे परिजनों के नाम पर संपत्तियों में निवेश किया गया।
संपत्तियों की जांच
जांच में महासमुंद और अन्य क्षेत्रों में परिजनों के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन खरीदने के तथ्य सामने आए। ईडी का कहना है कि ये खरीद उस समय हुई जब रानू साहू पद पर थीं।
कार्रवाई का क्रम
2022 में ईडी ने पांडुका स्थित निवास पर छापा मारा। कलमीदादर फार्महाउस की जांच। संपत्तियों को अटैच किया गया।हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। अब सभी अपीलें खारिज।