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Chhattisgarh News: सांसद बृजमोहन बनाम स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया विवाद लोकसभा पहुंचा, फैक्टुअल रिपोर्ट तलब, भूपेश बघेल भी आए समर्थन में


रायपुर, 3 अगस्त 2026।Brijmohan Agrawal Amit Kataria Phone Controversy  छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन के बीच खींचतान अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के बीच कथित फोन पर हुई बातचीत का विवाद अब लोकसभा सचिवालय के दरवाजे तक पहुंच चुका है। सांसद ने स्वास्थ्य सचिव पर संसदीय विशेषाधिकार के हनन का आरोप लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से शिकायत की है, जिसके बाद पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की गई है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल का आरोप है कि उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जनहित के कई मुद्दों पर स्वास्थ्य सचिव को कई पत्र और स्मरण पत्र भेजे, लेकिन महीनों तक कोई जवाब नहीं मिला। उनका कहना है कि यह एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की उपेक्षा और प्रशासन की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली को दर्शाता है।

शिकायत के अनुसार, 20 मई को मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव से चर्चा के बाद स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने उन्हें फोन किया था। सांसद का दावा है कि बाद में लंबित मामलों की जानकारी लेने के लिए दोबारा बातचीत के दौरान स्वास्थ्य सचिव का रवैया कथित तौर पर अपमानजनक था और उन्होंने “जो करना है कर लो” जैसी टिप्पणी की। इसी आधार पर बृजमोहन अग्रवाल ने संविधान के अनुच्छेद-105 के तहत प्राप्त संसदीय विशेषाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मामले को विशेषाधिकार समिति को भेजने और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

मामले को गंभीर मानते हुए लोकसभा सचिवालय ने कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय से पूरे घटनाक्रम पर हिंदी और अंग्रेजी में फैक्टुअल नोट उपलब्ध कराने को कहा है। यह रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष रखी जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा। इस बीच विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सांसद बृजमोहन अग्रवाल का समर्थन करते हुए कहा कि यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी का व्यवहार किसी सांसद के साथ इस प्रकार का होता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इसे उन मतदाताओं का भी अपमान बताया, जिन्होंने अपने प्रतिनिधि को संसद भेजा है। साथ ही राज्य सरकार पर अधिकारियों की घटती जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, इस पूरे विवाद पर स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब राजनीतिक गलियारों के साथ प्रशासनिक महकमे की नजरें भी लोकसभा सचिवालय द्वारा मांगी गई फैक्टुअल रिपोर्ट और उसके बाद होने वाले फैसले पर टिकी हैं।

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