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CG NEWS : “जवाब दो वरना रात यहीं कटेगी!”… महापौर पर अफसरों को ‘बंधक’ बनाने के आरोप से मचा बवाल

दुर्ग । controversy छत्तीसगढ़ के Durg में एक सरकारी कार्यक्रम ऐसा बिगड़ा कि अगले ही दिन नगर निगम दफ्तर “पॉलिटिकल थ्रिलर” का सेट बन गया। महापौर Alka Baghmar पर तीन अधिकारियों को केबिन में रोककर “बंधक” बनाने के आरोप लगे हैं। मामला इतना गर्माया कि एएसपी, सीएसपी और दो थानों की पुलिस को मौके पर पहुंचकर अफसरों को बाहर निकालना पड़ा।

भूमिपूजन से शुरू हुआ सियासी तूफान

पूरा विवाद उरला के एक सरकारी स्कूल में अतिरिक्त कक्ष के भूमिपूजन कार्यक्रम से शुरू हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर Gajendra Yadav मौजूद थे।बताया जा रहा है कि महापौर अलका बाघमार जब कार्यक्रम स्थल पहुंचीं, तब तक भूमिपूजन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। बस फिर क्या था… मंच पर पहुंचते ही महापौर का पारा चढ़ गया। उन्होंने अधिकारियों पर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने और सूचना व्यवस्था में लापरवाही का आरोप लगा दिया।

मंच से ही बरसीं महापौर

कार्यक्रम के बीच ही माहौल तब गरमा गया जब महापौर ने अधिकारियों को खुले मंच से खरी-खोटी सुना दी। उन्होंने कहा कि “काम नहीं करना है तो मुफ्त का वेतन लेने का भी हक नहीं है।”मंत्री के सामने हुई इस फटकार के बाद अफसरों के चेहरे उतर गए और पूरे कार्यक्रम में तनाव साफ दिखाई देने लगा।

नगर निगम बना ‘वार रूम’

 

कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। अगले दिन महापौर ने ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के कार्यपालन अभियंता जे.के. मेश्राम, एसडीओ सी.के. सोने और मंडी बोर्ड के एसडीओ प्रवीण पांडे को अपने केबिन में तलब कर लिया।सूत्रों के मुताबिक, महापौर ने अफसरों से पूछा कि आखिर कार्यक्रम में ऐसी “लापरवाही” क्यों हुई। जब जवाब उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला, तो माहौल और गर्म हो गया।

जवाब दो… तब तक कोई बाहर नहीं जाएगा”

 

चर्चा है कि महापौर ने सख्त लहजे में कहा कि “सही जवाब मिलने तक कोई भी बाहर नहीं जाएगा… चाहे रात हो जाए।” इतना ही नहीं, गार्ड को भी निर्देश दिए गए कि किसी अधिकारी को बाहर न जाने दिया जाए।बताया जा रहा है कि अधिकारियों को फोन करने तक के लिए बाहर नहीं निकलने दिया गया। इसके बाद केबिन का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।

फिर हुई पुलिस की एंट्री… और बदला पूरा सीन

 

अंदर बैठे अधिकारियों में से एक ने किसी तरह पुलिस को सूचना पहुंचाई। खबर मिलते ही एएसपी, सीएसपी और दो थानों की पुलिस टीम नगर निगम कार्यालय पहुंच गई।
पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और कथित तौर पर “रुके” अफसरों को बाहर निकाला। इसके बाद निगम कार्यालय में अफरा-तफरी और राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

महापौर बोलीं- “बंधक जैसी कोई बात नहीं”

 

पूरे विवाद पर महापौर अलका बाघमार ने सफाई देते हुए कहा कि अधिकारियों को सिर्फ जवाब मांगने के लिए बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि “कोई बंधक नहीं था। अधिकारियों ने खुद ही बात को बढ़ाया।”
महापौर का कहना है कि अधिकारियों ने आगे गलती नहीं दोहराने का भरोसा भी दिया था और पूरे मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।दुर्ग की सियासत में इस घटनाक्रम ने नया तूफान खड़ा कर दिया है। कोई इसे “जनप्रतिनिधि की सख्ती” बता रहा है, तो कोई “अफसरशाही बनाम नेताशाही” की लड़ाई।लेकिन फिलहाल नगर निगम के गलियारों में सबसे ज्यादा गूंज रही है एक ही लाइन “दुर्ग निगम में उस दिन आखिर चला किसका आदेश… महापौर का या पुलिस का?”

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