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Korba: थानेदार का अनोखा अंदाज… कड़क गांधी की माया हाथकड़ी से ज्यादा मजबूत!

कोरबा। कहते हैं, बॉस मेहरबान तो कोई भी बन जाता है पहलवान। यही कहावत पॉवर सिटी के सरहदी थाने के थानेदार पर फिट बैठती दिख रही है। लोग चटखारे लेकर चर्चा कर रहे हैं—”भाई साहब के थाने में नियम-कायदे की नहीं, गांधी की चलती है।”

असल में फर्क सरकार का नहीं पड़ता, चाहे भाजपा हो या कांग्रेस। सरकारी दफ्तरों में गांधी की छाप हमेशा कायम रहती है। पुलिस महकमा भी इससे अछूता नहीं। यहां तो सौ टका गांधी का ही सिक्का चलता है। जीरो टॉलरेंस की दुहाई देने वाली सरकार भी खाकी की इस खेलगाह में बस दर्शक बनी रहती है।

ताज़ा मामला कोल लिफ्टर हत्या कांड का है। कोर्ट ने फटकार लगाई, पर एसईसीएल के एजीएम साहब आज तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। सूत्र कहते हैं, थाने में चल रही “प्रोटेक्शन मनी” की परंपरा ने थानेदार के हाथ-पैर कस दिए हैं। वरना कानून के हाथ इतने भी छोटे नहीं कि चौहान तक न पहुंच पाएं।

पुराने किस्से याद आते हैं। जब कोल माफियाओं की शह पर एक नौजवान को भगोड़ा बताकर उसकी तस्वीर शहर के चौक-चौराहों और एटीएम पर चिपका दी गई थी। आज वही पुलिस गंभीर केस में कोर्ट के आदेश पर भी एजीएम को पकड़ने का प्रयास तक नहीं कर रही। न एसआईटी बनी, न खोजबीन हुई। पुलिस मानो बस इस इंतजार में बैठी है कि साहब जमानत ले लें, फिर मिठाई बंटे और जश्न मनाया जाए।

थाने में काम करने वाले मातहत भी सब जानते हैं, लेकिन आवाज किसे सुनाएं? चुप रहना ही बेहतर समझते हैं। शहरवासी तंज कसते हुए कह रहे है “यहां तो नियम-कायदे, धाराएं-वाराएं सब छुट्टी पर हैं… और गांधी महाराज ड्यूटी पर है।”

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