RTI Pending Applications : सुशासन पर सवाल…! छत्तीसगढ़ में 1 लाख RTI आवेदन लंबित…सबसे ज्यादा जानकारी छिपा रहा पंचायत विभाग?

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Pending RTI Applications

रायपुर, 21 जुलाई। RTI Pending Applications : छत्तीसगढ़ में सूचना का अधिकार (RTI) कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पिछले दो वर्षों में राज्य के विभिन्न विभागों में 1 लाख से अधिक आरटीआई आवेदन लंबित पड़े हैं। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान करीब 1.54 लाख आरटीआई आवेदन दायर किए गए, लेकिन इनमें से 1,00,679 आवेदनों का अब तक निराकरण नहीं हो सका।

सबसे ज्यादा लंबित आवेदन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े हैं। इसके अलावा स्कूल शिक्षा, नगरीय प्रशासन, वन, गृह, राजस्व और खाद्य विभाग में भी हजारों आवेदन लंबित हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब सरकार सुशासन का दावा करती है तो सूचना देने में इतनी देरी क्यों हो रही है।

दो साल में RTI की स्थिति

वर्ष 2024-25

  • कुल आवेदन: 69,463
  • लंबित आवेदन: 49,054

वर्ष 2025-26

  • कुल आवेदन: 84,935
  • लंबित आवेदन: 51,625

कुल लंबित आवेदन

  • 1,00,679

किन विभागों में सबसे ज्यादा आवेदन लंबित?

वर्ष 2024-25

  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास- 39,614
  • स्कूल शिक्षा- 1,403
  • नगरीय प्रशासन- 1,042
  • वन- 726
  • राजस्व- 721
  • उच्च शिक्षा- 694
  • गृह- 412
  • कृषि – 386
  • सामान्य प्रशासन- 346

वर्ष 2025-26

  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास- 27,563
  • वन- 4,192
  • खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति- 3,276
  • स्कूल शिक्षा- 3,070
  • नगरीय प्रशासन- 1,514
  • राजस्व- 1,498
  • सामान्य प्रशासन- 1,151
  • गृह- 1,074
  • कृषि- 907
  • उच्च शिक्षा- 630

RTI कानून क्या कहता है?

सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत प्रत्येक नागरिक को सरकारी विभागों से सूचना मांगने का अधिकार है। सामान्य मामलों में 30 दिनों के भीतर जानकारी देना अनिवार्य है। समय पर सूचना नहीं देने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ राज्य सूचना आयोग कार्रवाई कर सकता है।

RTI के जरिए नागरिक सरकारी योजनाओं, खर्च, फाइलों की स्थिति, विकास कार्यों, पेंशन, राशन, मनरेगा, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

बड़ा सवाल

जब राज्य के 18 हजार से अधिक सरकारी कार्यालयों में लोक सूचना अधिकारी नियुक्त हैं और राज्य सूचना आयोग भी कार्यरत है, तब भी 1 लाख से ज्यादा RTI आवेदन लंबित होना प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह स्थिति पारदर्शिता और सुशासन के दावों की भी परीक्षा ले रही है।

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