CG High Court Divorce Case : बूढ़ी मां को छोड़कर अलग न रहना पत्नी के प्रति क्रूरता नहीं, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

News Power Zone
4 Min Read

बिलासपुर, 02 सितंबर। CG High Court Divorce Case : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि शादी के बाद भी व्यक्ति की अपने वृद्ध और बीमार माता-पिता के प्रति जिम्मेदारियां खत्म नहीं होतीं। अदालत ने कहा कि यदि पति अपनी बूढ़ी और बीमार मां को छोड़कर अलग रहने से इनकार करता है, तो केवल इस आधार पर उसके व्यवहार को पत्नी के प्रति वैवाहिक क्रूरता नहीं माना जा सकता।

जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी ने तलाक की मांग करने वाले पति की अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उसकी तलाक याचिका खारिज की गई थी। हाईकोर्ट ने संबंधित विवाह को समाप्त करने का आदेश भी दिया।

अलग घर की मांग पर हाईकोर्ट ने रखी अहम बात

मामले में पत्नी चाहती थी कि उसका पति उससे अलग घर लेकर रहे। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि अलग रहने की मांग को हर मामले में वैवाहिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। पति या पत्नी के पास अलग रहने के उचित और वास्तविक कारण हो सकते हैं, इसलिए हर मामले के तथ्यों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

अदालत ने यह भी कहा कि यह देखना होगा कि अलग घर की मांग के पीछे वास्तविक वजह क्या है। साथ ही यह भी जांचना जरूरी है कि कहीं यह मांग पति को उसके माता-पिता से संबंध तोड़ने या पारिवारिक जिम्मेदारियों से पीछे हटने के लिए मजबूर करने का प्रयास तो नहीं है।

बीमार मां के साथ रहना पति की पारिवारिक जिम्मेदारी

इस मामले में पति की मां काफी बुजुर्ग और बीमार थीं। पति ने अपनी मां से अलग रहने से इनकार किया और उनके साथ रहने की इच्छा जताई। हाईकोर्ट ने इसे परिवार के प्रति उसकी वाजिब जिम्मेदारी माना।

अदालत ने कहा कि विवाह के बाद व्यक्ति के जीवन में नया पारिवारिक रिश्ता जरूर जुड़ता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपने पहले से मौजूद पारिवारिक रिश्तों और जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुंह मोड़ ले।

शादी के बाद माता-पिता की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि विवाह व्यक्ति को अपने माता-पिता की जिम्मेदारियों से मुक्त होने का असीमित अधिकार नहीं देता। खासकर जब माता-पिता वृद्ध या बीमार हों, तब उनकी देखभाल करना महत्वपूर्ण पारिवारिक दायित्व हो सकता है।

इसी आधार पर अदालत ने माना कि पति का अपनी वृद्ध और बीमार मां से अलग नहीं होना, अपने आप में पत्नी के प्रति क्रूरता नहीं कहा जा सकता।

ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा, विवाह समाप्त

पति ने तलाक के लिए ट्रायल कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में अपील की। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने पति की अपील स्वीकार कर ली और ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया।

इसके साथ ही अदालत ने संबंधित विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया।

अलग रहने की मांग पर हर केस में अलग होगा फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला उन वैवाहिक विवादों में अहम माना जा रहा है, जहां पति-पत्नी के बीच अलग रहने और वृद्ध माता-पिता की देखभाल को लेकर मतभेद होते हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल अलग घर की मांग के आधार पर किसी व्यवहार को क्रूरता नहीं माना जा सकता। इसके लिए पति-पत्नी के व्यवहार, अलग रहने की वजह और परिवार की वास्तविक परिस्थितियों को देखना जरूरी होगा। वहीं, शादी के बाद वृद्ध या बीमार माता-पिता के प्रति व्यक्ति की जिम्मेदारियां स्वतः समाप्त नहीं हो जातीं।

Share This Article