सिवनी, 14 अक्टूबर। Seoni Hawala Scandal : मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में हवाला धन लूट मामले ने तूल पकड़ लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर डीजीपी कैलाश मकवाना ने बड़ा कदम उठाते हुए एक एसडीओपी और थाना प्रभारी सहित कुल 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ डकैती, अपहरण और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है मामला?
सिवनी में हवाला कारोबार से जुड़ी बड़ी रकम की बरामदगी के बाद यह सवाल उठा कि पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पारदर्शी नहीं थी। जांच में यह बात सामने आई कि पुलिसकर्मियों ने अवैध रूप से धन जब्त किया और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी जानकारी नहीं दी। जबलपुर रेंज के आईजी प्रमोद वर्मा ने सिवनी के एसपी और एएसपी को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। उन्होंने सख्त लहजे में पूछा है कि, बरामद पैसे का स्रोत और स्वामित्व स्पष्ट क्यों नहीं किया गया? वरिष्ठ अधिकारियों से जानकारी साझा क्यों नहीं की गई? बेसिक फैक्ट्स क्यों छुपाए गए?
जांच की जिम्मेदारी
इस प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी जबलपुर क्राइम ब्रांच के एडिशनल एसपी जितेन्द्र सिंह को सौंपी गई है। हवाला कारोबारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर की केस डायरी जबलपुर भेज दी गई है, और जल्द ही इस नए मामले की डायरी भी भेजी जाएगी।सूत्रों के अनुसार, अगर एसपी का जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो इस हफ्ते के भीतर ही उन पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।यह मामला न केवल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है, बल्कि पूरे राज्य के कानून-व्यवस्था तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
यह घटना मप्र पुलिस के इतिहास में एक बड़े और दुर्लभ घटनाक्रम के रूप में देखी जा रही है, जहाँ स्वयं राज्य सरकार ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ डकैती जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने की अनुमति दी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।