देवास, 24अगस्त। Dewas News : मध्य प्रदेश के देवास जिले में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर एक रिटायर्ड कर्मचारी से करीब 63 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगी के बाद देवास पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलाया। पुलिस ने 17 राज्यों के 33 जिलों में 127 दिनों तक कार्रवाई करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम में से 54.84 लाख रुपये बरामद किए गए हैं।
रिटायर्ड कर्मचारी को बनाया डिजिटल अरेस्ट का शिकार
मामला देवास के रिटायर्ड फैक्ट्री कर्मचारी सुरेश इंग्ले से जुड़ा है। आरोप है कि साइबर ठगों ने उन्हें फोन और अन्य माध्यमों से ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाया। ठगों ने खुद को जांच एजेंसियों से जुड़ा बताकर बुजुर्ग को इतना भयभीत कर दिया कि उन्होंने अपनी जमा पूंजी आरोपियों के बताए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। बाद में ठगी का अहसास होने पर उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
17 राज्यों में पुलिस की दबिश
शिकायत के बाद देवास पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच अभियान शुरू किया। पुलिस के मुताबिक करीब 127 दिनों तक 70 पुलिसकर्मियों की 19 टीमें इस ऑपरेशन में जुटी रहीं। जांच टीमों ने देश के 17 राज्यों के 33 जिलों में दबिश दी और करीब 58,315 किलोमीटर की दूरी तय कर साइबर ठगी के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ीं।
12 आरोपी गिरफ्तार, 11 जेल भेजे गए
पुलिस कार्रवाई के दौरान राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और बिहार समेत कई राज्यों में दबिश दी गई। इसके बाद गिरोह के 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में से 11 को कोर्ट के आदेश के बाद जेल भेज दिया गया है। वहीं पश्चिम बंगाल निवासी आरोपी कमलकान्ति को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और मामलों के बारे में भी जानकारी मिल सकती है।
54.84 लाख रुपये बरामद
इस कार्रवाई में पुलिस ने ठगी गई रकम में से 54 लाख 84 हजार रुपये बरामद करने का दावा किया है। साइबर ठगी के मामलों में रकम कई खातों में ट्रांसफर होने और तेजी से निकाल लिए जाने के कारण रिकवरी चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे में पुलिस की यह कार्रवाई मामले की अहम उपलब्धि मानी जा रही है।
SP ने कहा- कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं
देवास एसपी पुनीत गेहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामले का खुलासा करते हुए लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। अगर कोई व्यक्ति पुलिस, CBI या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन अथवा वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाए और पैसे की मांग करे, तो घबराने के बजाय तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें।
ऐसे बचें ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड से
वीडियो कॉल पर कोई अधिकारी बनकर धमकाए तो घबराएं नहीं। गिरफ्तारी या केस खत्म करने के नाम पर पैसे मांगे जाएं तो रकम ट्रांसफर न करें। OTP, PIN, बैंक डिटेल या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा न करें। संदिग्ध कॉल की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें।












