
कोरबा। Manikpur Mine Expansion Public Hearing मानिकपुर खदान विस्तार परियोजना को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने एसईसीएल प्रबंधन पर प्रभावित ग्रामीणों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए साफ चेतावनी दी है कि मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार से वंचित परिवारों को न्याय दिए बिना 21 अगस्त की जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि प्रबंधन ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली तो जनसुनवाई का जोरदार विरोध होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।

सोमवार को भिलाई खुर्द क्रमांक-1, 2 एवं 3, बरबसपुर, कर्रानाला, कदमहाखार, इमलीडुग्गू, रापाखर्रा, मानिकपुर, दादर खुर्द, ढेलवाडीह और कुदरी बस्ती सहित आसपास के गांवों से पहुंचे सैकड़ों ग्रामीणों ने जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी पीड़ा रखी। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की मांग लंबित है, लेकिन एसईसीएल प्रबंधन लगातार आश्वासन देकर मामले को टालता रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि उनकी मांगों को लेकर जयसिंह अग्रवाल पहले ही एसईसीएल के सीएमडी को पत्र लिख चुके हैं और जनसुनवाई से पहले सभी लंबित मामलों का समाधान करने का आग्रह कर चुके हैं। इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि “विकास के नाम पर प्रभावित परिवारों के अधिकारों की बलि नहीं दी जा सकती। जिन लोगों ने अपनी जमीन और आशियाना खोया, उन्हें उनका कानूनी हक मिले बिना परियोजना आगे बढ़ाना अन्याय है।”
उन्होंने कहा कि एसईसीएल पहले ग्रामीणों को उनका हक दे, उसके बाद ही जनसुनवाई की बात करे। यदि प्रबंधन ने प्रभावित परिवारों की आवाज को दबाने की कोशिश की तो पूरा क्षेत्र एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगा।
ग्रामीणों ने भी ऐलान किया कि मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार के सभी लंबित मामलों का समाधान होने तक जनसुनवाई का समर्थन नहीं किया जाएगा। जल्द ही कलेक्टर कोरबा को विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसकी प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक, महाप्रबंधक (मानिकपुर क्षेत्र) और मुख्य महाप्रबंधक, एसईसीएल को भी भेजी जाएगी।
जयसिंह अग्रवाल ने अंत में कहा कि “मैं पहले भी प्रभावित परिवारों के साथ था, आज भी हूं और आगे भी उनके हक की लड़ाई हर मंच पर लड़ता रहूंगा। यह लड़ाई किसी राजनीति की नहीं, बल्कि लोगों के अधिकार और न्याय की है।”






