CG Education Department : ऑनलाइन हाजिरी से खुला ‘संलग्नीकरण उद्योग’…! 10 हजार से ज्यादा शिक्षक-कर्मचारी स्कूल छोड़ दूसरे विभागों में तैनात…कोई MLA का PA…कोई कलेक्टोरेट में बाबू

News Power Zone
3 Min Read
CG Education Department

रायपुर, 16 जुलाई। CG Education Department : छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में वर्षों से चल रहे ‘संलग्नीकरण (अटैचमेंट) उद्योग’ पर अब ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विभागीय पड़ताल के अनुसार 10 हजार से अधिक शिक्षक, बाबू और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपनी मूल पदस्थापना छोड़कर दूसरे विभागों में काम कर रहे हैं।

1 जुलाई से लागू ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के तहत अब हाजिरी केवल उसी स्कूल या कार्यालय से लग सकेगी, जहां कर्मचारी की वास्तविक पदस्थापना है। इसी व्यवस्था ने वर्षों से चल रहे अटैचमेंट के खेल को उजागर करना शुरू कर दिया है।

स्कूल छोड़ दफ्तरों में कर रहे थे ड्यूटी

जानकारी के मुताबिक कई शिक्षक कलेक्टोरेट, तहसील, पंचायत कार्यालय, बाढ़ नियंत्रण कक्ष और अन्य सरकारी दफ्तरों में काम कर रहे हैं। कुछ शिक्षक जनप्रतिनिधियों के निजी स्टाफ के रूप में भी कार्यरत बताए गए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा व्यायाम शिक्षकों (PT Teachers) की है, जो बच्चों को खेल सिखाने के बजाय कार्यालयों में फाइलें संभाल रहे हैं।

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि कर्मचारी अपनी मूल पदस्थापना वाले स्थान पर उपस्थित नहीं होंगे तो उनकी ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगेगी, और ऐसे मामलों में वेतन रोकने तक की कार्रवाई की जा सकती है। जिलों से ऐसे कर्मचारियों की सूची मुख्यालय भेजी जा रही है।

बिलासपुर में विधायक के साथ अटैच शिक्षक

बिलासपुर जिले में जारी सूची के अनुसार 57 शिक्षकों का अटैचमेंट विभिन्न कार्यालयों में किया गया है। इनमें एक शिक्षक के विधायक के साथ अटैच होने की जानकारी भी सामने आई है।

कोंडागांव से आया चौंकाने वाला पत्र

पड़ताल में कोंडागांव से ऐसा पत्र सामने आया, जिसमें कर्मचारियों की कमी का हवाला देते हुए कलेक्टर ने शिक्षा विभाग से अटैचमेंट जारी रखने की अनुमति मांगी है। पत्र के साथ अटैच कर्मचारियों की सूची भी भेजी गई है।

सरकार का स्पष्ट संदेश

शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कहा है कि राज्य शासन के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का अन्य विभागों में संलग्नीकरण उचित नहीं है, क्योंकि इससे स्कूलों की पढ़ाई और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों प्रभावित होती हैं।

Share This Article