Korba Bhojli Rally: पुरखौती संस्कृति के रंग में रंगा कोरबा, मांदर की थाप पर झूमा घंटाघर; भोजली रैली में उमड़ा माटी पुत्रों का जन सैलाब

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 Korba Bhojli Rally :महापौर संजू देवी राजपूत और सभापति नूतन सिंह ठाकुर की मौजूदगी में दिखा छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान का जलवा, क्रांति सेना के शीर्ष नेतृत्व ने बढ़ाई महोत्सव की गरिमा

कोरबा। Korba Bhojli Rally:  माटी की सोंधी खुशबू, मांदर की गूंजती थाप, भोजली के कलश और पुरखौती संस्कृति के जयघोष से शनिवार को ऊर्जाधानी कोरबा का घंटाघर चौक छत्तीसगढ़िया रंग में सराबोर हो गया। मौका था छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना द्वारा आयोजित प्रदेश स्तरीय जबर भोजली रैली एवं महोत्सव का, जहां हजारों की संख्या में माटी पुत्रों ने पहुंचकर अपनी संस्कृति, परंपरा और लोक विरासत के प्रति जबरदस्त उत्साह दिखाया।

 

सिर पर भोजली का कलश लिए माताओं-बहनों की कतार और पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवाओं का हुजूम जब घंटाघर की सड़कों से गुजरा तो पूरा माहौल छत्तीसगढ़िया अस्मिता के जयघोष से गूंज उठा। मांदर, पारंपरिक वाद्य यंत्र और डीजे की धुन पर थिरकते युवाओं ने रैली को सांस्कृतिक महोत्सव में बदल दिया।

 

महापौर और सभापति ने बढ़ाया उत्साह

 

भोजली महोत्सव में कोरबा महापौर संजू देवी सिंह राजपूत एवं नगर निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर भी शामिल हुए। दोनों ने आयोजन की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा और संस्कृति को सहेजने वाले ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया।

 

मंच पर छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के संस्थापक सदस्य ललित साहू, अनिल धनकर, अविनाश चंद्राकर और विनोद देवांगन विशेष रूप से मौजूद रहे।

 

आयोजन में संगठन के प्रांतीय नेतृत्व की भी दमदार मौजूदगी रही। प्रदेश संरक्षक रामगुलाम सिंह ठाकुर, प्रदेश संयोजक दिलीप मिरी, प्रदेश अध्यक्ष धीरेंद्र साहू, प्रदेश उपाध्यक्ष उमा गोपाल, प्रदेश महामंत्री रूपेंद्र देवांगन, प्रदेश प्रवक्ता गजेंद्र रथ वर्मा, प्रदेश प्रभारी मनी कठोत्रे, प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष अतुल दास महंत, प्रदेश आरटीआई प्रमुख जितेंद्र साहू और नव-नियुक्त प्रदेश सलाहकार प्रमुख देवेंद्र श्रीवास सहित संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।

 

छत्तीसगढ़ महतारी की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

 

रैली में निकली छत्तीसगढ़ महतारी की जीवंत झांकी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान और छत्तीसगढ़ी लोक त्योहारों पर आधारित झांकियों के जरिए सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश भी दिया गया।

 

लोक संस्कृति की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। कर्मा नृत्य, सुवा नृत्य, बस्तरीहा पारंपरिक नृत्य और भव्य शिव तांडव की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। महिला और पुरुष नृत्य दलों की प्रस्तुतियों पर पूरा घंटाघर परिसर तालियों और जयघोष से गूंजता रहा।

 

जिलों से लेकर खंडों तक दिखी संगठन की ताकत

 

प्रदेश स्तरीय आयोजन में विभिन्न जिलों और खंडों से पहुंचे नवनियुक्त पदाधिकारियों ने भी बड़ी संख्या में भागीदारी की। जांजगीर, बालको, पाली, दीपका, कुसमुंडा और कोरबा शहर टीम के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता पूरे उत्साह के साथ रैली में शामिल हुए।

 

जांजगीर से जिलाध्यक्ष सुभाष साहू, जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष भूपेंद्र देवांगन और महिला जिलाध्यक्ष नीता साहू सहित विभिन्न पदाधिकारी पहुंचे।

 

बालको, पाली, दीपका और कुसमुंडा खंड के अध्यक्षों, संयोजकों, उपाध्यक्षों, सचिवों, संगठन पदाधिकारियों, मीडिया प्रभारियों और महिला पदाधिकारियों की भी उल्लेखनीय मौजूदगी रही। शहर टीम कोरबा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाई।

 

यह सिर्फ रैली नहीं, पुरखों के संस्कारों की सांस्कृतिक गूंज’

 

छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के जिलाध्यक्ष एलेक्जेंडर टोप्पो, महिला विंग जिलाध्यक्ष विमला ध्रुव, जिला सचिव बसंत दास, जिला प्रभारी खेम साहू, जिला महामंत्री राजेश साहू, जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष नरेश दास महंत, जिला सह-संरक्षक हेमंत नामदेव एवं मीडिया प्रभारी कन्हैया सुंदर ने संयुक्त रूप से आयोजन की सफलता पर आभार जताया।

 

उन्होंने कहा कि जबर भोजली महोत्सव महज एक रैली नहीं, बल्कि पुरखों के संस्कार, माटी से जुड़ाव और धरती मां के प्रति कृतज्ञता की सांस्कृतिक गूंज है। विशाल जनसैलाब के बावजूद आयोजन को अनुशासित, सुरक्षित और सुगम बनाने में सहयोग देने वाले जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, अधिकारियों और जवानों के प्रति उन्होंने विशेष आभार व्यक्त किया।

 

साथ ही पारंपरिक वेशभूषा में शामिल माताओं-बहनों, युवाओं, लोक कलाकारों और आयोजन की आवाज को जन-जन तक पहुंचाने वाले प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकारों का भी आभार व्यक्त किया गया। घंटाघर से उठी भोजली की यह गूंज एक बार फिर बता गई कि छत्तीसगढ़ की माटी, संस्कृति और पुरखौती परंपरा आज भी लोगों के दिलों में उतनी ही जिंदा है।

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