Nepal Flood School : प्रिंसिपल के एक फैसले ने बचाई 1643 जानें, स्कूल में थे 1644 लोग, एक शिक्षक की गई जान

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नेपाल, 30 अगस्त। Nepal Flood School :  नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच त्रिशूली घाटी के एक स्कूल से दिल दहला देने वाली लेकिन प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ने की सूचना मिलते ही त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बिना समय गंवाए ऐसे फैसले लिए, जिससे स्कूल में मौजूद 1644 लोगों में से 1643 की जान बच गई। इस हादसे में स्कूल के एक शिक्षक की मौत हो गई।

अचानक आया फोन और प्रिंसिपल ने समझ लिया खतरा

बुधवार को स्कूल में सामान्य दिनों की तरह पढ़ाई चल रही थी। बड़ी संख्या में बच्चे और शिक्षक स्कूल पहुंच चुके थे। इसी दौरान प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी के मोबाइल पर उनके एक दोस्त का फोन आया। दोस्त ने उन्हें बताया कि इलाके में बाढ़ आ चुकी है और ऊपरी हिस्सों में बसे गांव भी पानी की चपेट में आ गए हैं।

सूचना मिलते ही प्रिंसिपल ने हालात की गंभीरता को समझा और स्कूल आने वाले बच्चों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी। उस समय करीब 900 बच्चे स्कूल पहुंच चुके थे, जबकि लगभग 700 बच्चे अभी रास्ते में थे।

बसों को स्कूल आने से पहले ही लौटने का आदेश

राजेंद्र दवाड़ी ने तत्काल स्कूल आने वाली बसों के ड्राइवरों को फोन कर उन्हें स्कूल लाने के बजाय वापस लौटने का निर्देश दिया। इसी दौरान एक अभिभावक ने भी फोन कर बताया कि बाढ़ का पानी तेजी से स्कूल की ओर बढ़ रहा है।

कुछ ही देर बाद एक स्कूल बस स्कूल की तरफ आती दिखाई दी। प्रिंसिपल ने ड्राइवर को तुरंत बस वापस मोड़ने को कहा। ड्राइवर ने बस मोड़ ली और जैसे ही वह स्कूल के सामने बने पुल को पार कर आगे बढ़ा, पुल बाढ़ के तेज बहाव में बह गया।

अगर बस कुछ मिनट और वहां रुक जाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। प्रिंसिपल के इस तत्काल फैसले ने बस में सवार बच्चों की जान बचा ली।

बच्चों को लेकर पहाड़ी पर जाने का लिया फैसला

स्कूल परिसर में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ने लगा तो बच्चों और शिक्षकों के बीच डर का माहौल बन गया। ऐसे समय में प्रिंसिपल ने सभी शिक्षकों को बच्चों के साथ तुरंत सुरक्षित ऊंचाई पर जाने का निर्देश दिया।

एक बच्ची को पैनिक अटैक आने के बाद राजेंद्र दवाड़ी ने उसे मोटरसाइकिल पर बैठाकर सुरक्षित स्थान की ओर पहुंचाया। वहीं, बाकी बच्चों को शिक्षकों की निगरानी में पैदल पहाड़ी की ओर भेजा गया।

सभी बच्चों को सुरक्षित स्थान पर भेजने के बाद प्रिंसिपल ने एक बार फिर स्कूल परिसर में जाकर स्थिति का जायजा लिया और इसके बाद खुद भी पहाड़ी की ओर निकल गए।

बोधि वृक्ष के नीचे बिताई बाढ़ की भयावह रात

स्कूल में मौजूद बच्चे, शिक्षक और कर्मचारी पहाड़ी की ऊंचाई पर पहुंचे। वहां बोधि वृक्ष के नीचे सभी ने सुरक्षित स्थान पर रहकर बाढ़ का पानी कम होने का इंतजार किया।

बताया गया कि स्कूल में मौजूद कुल 1644 लोगों में से 1643 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। हालांकि, इस त्रासदी में स्कूल के सोशल हिस्ट्री शिक्षक सैंटोस परियार की जान नहीं बचाई जा सकी। वह बाढ़ के तेज बहाव में बह गए।

एक शिक्षक की मौत, 1643 लोगों की बची जान

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बीच प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी की सतर्कता और समय पर लिए गए फैसले ने सैकड़ों बच्चों समेत 1643 लोगों की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभाई। एक फोन कॉल को गंभीरता से लेना, स्कूल बसों को वापस भेजना और बच्चों को तत्काल सुरक्षित ऊंचाई पर पहुंचाना—इन फैसलों ने एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया।

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