
कोरबा। Korba Urea Seized उरगा में कृषि विभाग ने 100 बोरी (करीब 4.5 टन) आईपीएल यूरिया जब्त कर अपनी कार्रवाई का दावा किया है, लेकिन इस पूरे मामले ने विभाग की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उर्वरकों की बिक्री और भंडारण पर कृषि विभाग की नियमित निगरानी रहती है, तो फिर 100 बोरी यूरिया का कथित अवैध भंडारण आखिर विभाग की नजरों से इतने दिनों तक कैसे बचा रहा?
कृषि विभाग के अनुसार सूचना मिलने पर टीम ने सिलियरी भाटा, उरगा स्थित एक गोदाम में छापा मारा, जहां 100 बोरी आईपीएल यूरिया रखा मिला। जांच के दौरान संबंधित खाद विक्रेता से खरीद-बिक्री के बिल और अन्य दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वह कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद विभाग ने यूरिया का नमूना लेकर पूरी खेप जब्त कर ली।
हालांकि कार्रवाई के बाद अब कई सवाल उठ रहे हैं। यदि गोदाम अघोषित था और इतनी बड़ी मात्रा में खाद जमा थी, तो विभाग की नियमित जांच और निरीक्षण व्यवस्था क्या कर रही थी? क्या यह भंडारण एक-दो दिन में हुआ या लंबे समय से चल रहा था? यदि लंबे समय से चल रहा था, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या केवल जब्ती की कार्रवाई कर मामला खत्म कर दिया जाएगा?
किसानों का कहना है कि खेती के मौसम में अक्सर खाद की कमी की शिकायत सामने आती है। ऐसे समय में यदि बड़ी मात्रा में यूरिया निजी गोदामों में जमा मिले तो इससे कालाबाजारी की आशंका भी मजबूत होती है। ऐसे में केवल जब्ती नहीं, बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है।
फिलहाल कृषि विभाग ने जब्त यूरिया को अग्रिम वैधानिक कार्रवाई तक सुपुर्दगी में रखवा दिया है और जांच जारी होने की बात कही है। लेकिन अब लोगों की नजर इस बात पर है कि क्या विभाग केवल व्यापारी पर कार्रवाई करेगा या अपनी निगरानी व्यवस्था की विफलता की भी समीक्षा करेगा।






