कोरबा की बात, कॉफी विद 28 का आठ… और रेंजर साहब के ठाठ!

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​कोरबा।Coffee with 28 Ka 8 टीवी पर आपने करण जौहर का चर्चित शो ‘कॉफी विद करण’ जरूर देखा होगा, जहां फिल्मी सितारे कॉफी की चुस्कियों के साथ अपने राज खोलते हैं। लेकिन इन दिनों बालको के जंगलों में इससे भी ज्यादा चर्चित एक शो चल रहा है, जिसका नाम है “कॉफी विद 28 का 8… और रेंजर साहब के ठाठ!” फर्क सिर्फ इतना है कि यहां कॉफी के कप के साथ राज नहीं, बल्कि सरकारी खजाने का ‘जादुई’ गणित खुल रहा है।

 

​कहानी शुरू होती है डीएमएफ (DMF – डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) के करीब 90 लाख रुपयों से। इस भारी-भरकम राशि से जंगलों के बीच एक आकर्षक कॉफी पॉइंट और वन चेतना केंद्र तैयार किया गया। मकसद बिल्कुल साफ और नेक था जंगल की सैर पर आने वाले लोग प्रकृति के बीच कॉफी का आनंद लें, पर्यटन को बढ़ावा मिले और इससे होने वाली आमदनी से दूधीटांगर वन प्रबंधन समिति के स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका मजबूत हो लेकिन, असली खेल तो इसके बाद शुरू हुआ।

 

जैसे-जैसे कॉफी पॉइंट पर सैलानियों की भीड़ बढ़ी, वैसे-वैसे वहां नोटों की खुशबू भी महकने लगी। बस फिर क्या था… रेंजर साहब की नजर कॉफी मशीन से ज्यादा कैश काउंटर पर जाकर टिक गई। शायद साहब के मन में विचार आया कि जब कॉफी का पूरा सेटअप सरकारी है, तो इसकी मलाई का स्वाद जनता या ग्रामीण क्यों चखें? सूत्रधार की माने तो कॉफी पॉइंट की कुल आय का हिसाब-किताब कागजों पर उतरा, तो 28 लाख रुपये का आंकड़ा किसी तिलिस्म से सिकुड़कर सिर्फ 8 लाख रुपये रह गया। यानी पूरे 20 लाख रुपये ऐसे गायब हुए, मानो गर्म कॉफी की भाप बनकर हवा में उड़ गए हों! वो तो भला हो डीएफओ मैडम का जिनकी नजर रजिस्टर पर पड़ी और 20 लाख की गड़बड़ी का खुलासा कर दिया। बालको रेंज में हुए इस रहस्यमयी घटना पर जनमानस चुटकी लेते हुए कहने लगे है कॉफी विद 28 का आठ… और रेंजर साहब के ठाठ है भाई..!

 

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