
कोरबा।Korba Breaking सड़क दुर्घटनाएं केवल आंकड़े नहीं होतीं, बल्कि किसी परिवार की खुशियां छीन लेने वाली त्रासदी होती हैं। इन्हीं हादसों पर प्रभावी रोक लगाने और जिले में सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर कुणाल दुदावत और पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने जिला सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि सड़क सुरक्षा अब केवल सरकारी विभागों का काम नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

बैठक में दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट, खराब सड़क किनारे, संकेतकों की कमी, अतिक्रमण, ओवरस्पीडिंग और नशे में वाहन चलाने जैसी दुर्घटनाओं की प्रमुख वजहों पर गंभीर चर्चा हुई। कलेक्टर ने संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा कार्यों में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
बैठक के दौरान लोक निर्माण विभाग की धीमी कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कार्यपालन अभियंता को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। भैंसमा स्कूल से सक्ती मोड़, बालको ऐश डेक रोड, रिस्दी ब्रिज से बजरंग चौक, दीपका-झाबर रोड और दीपका थाना चौक जैसे संवेदनशील स्थानों पर लंबित सुरक्षा कार्यों को शीघ्र पूरा करने को कहा गया।
पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शराब पीकर वाहन चलाने, ओवरस्पीडिंग, बिना हेलमेट, ट्रिपल राइडिंग, बिना नंबर प्लेट और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाए।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय स्कूलों और कॉलेजों में सड़क सुरक्षा को जनआंदोलन बनाने का रहा। हेलमेट रैली, नुक्कड़ नाटक, क्विज, निबंध प्रतियोगिता और एनसीसी-स्काउट गाइड की भागीदारी के माध्यम से युवाओं में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की रणनीति बनाई गई। यह पहल आने वाली पीढ़ी में जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सड़क सुरक्षा का असली समाधान समाज की सोच में बदलाव
सड़कें सुरक्षित तभी बनेंगी, जब प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ नागरिक भी नियमों को आदत बनाएंगे। हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना, गति सीमा का पालन करना, नशे में वाहन नहीं चलाना और ट्रैफिक नियमों का सम्मान करना केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि अपने और दूसरों के जीवन के प्रति जिम्मेदारी है।
सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की फाइल का विषय नहीं, बल्कि हर परिवार की चिंता और पूरे समाज का साझा दायित्व है। यदि प्रशासन की सख्ती और नागरिकों की जागरूकता साथ आए, तो सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि एक वास्तविक उपलब्धि बन सकती है।






