Indira Awas Yojana Scam : कोरबा के चर्चित इंदिरा आवास घोटाले में EOW का बड़ा एक्श…! 79 लाख रुपये गबन मामले में 3000 पेज की चार्जशीट दाखिल

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Indira Awas Yojana Scam

कोरबा, 06 जुलाई। Indira Awas Yojana Scam : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित इंदिरा आवास योजना घोटाले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गरीब हितग्राहियों की आवास सहायता राशि के कथित गबन मामले में विशेष न्यायालय में करीब 3000 पेज का अभियोग पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, कियोस्क संचालक पर बैंकिंग सिस्टम की तकनीकी खामियों और बैंक कर्मचारियों की आईडी का दुरुपयोग कर 79 लाख रुपये अपने और परिजनों के खातों में स्थानांतरित करने का आरोप है।

बैंक कर्मचारियों की आईडी के दुरुपयोग का आरोप

EOW के मुताबिक, आरोपी गौरव शुक्ला, बैंक ऑफ इंडिया की कोरबा शाखा में कियोस्क संचालक था। जांच में आरोप है कि उसने निष्क्रिय खातों को दोबारा सक्रिय कर लाभार्थियों के आधार नंबर हटाए और उनकी जगह अपने, पिता, माता, पत्नी तथा पुत्र के आधार नंबर लिंक कर दिए। इसके बाद AEPS (आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम) के जरिए रकम निकाली गई।

Finacle Software की कमियों का उठाया फायदा

जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2017 के दौरान Finacle Software की तकनीकी कमजोरियों का कथित तौर पर फायदा उठाया गया। EOW के अनुसार, बिना आधार सत्यापन के ट्रांजेक्शन और ऑटो लॉगआउट जैसी सुरक्षा सुविधाओं के अभाव का इस्तेमाल करते हुए 9 बैंक स्टाफ यूजर आईडी से 426 खातों में 620 आधार सीडिंग प्रविष्टियां की गईं।

2010-11 की आवास सहायता राशि पर कथित गबन

जांच एजेंसी का दावा है कि वर्ष 2010-11 में इंदिरा आवास योजना के तहत गरीब लाभार्थियों के लिए भेजी गई सहायता राशि को वर्ष 2017 में फर्जी तरीके से अपने खातों में ट्रांसफर किया गया। आरोप है कि इस तरीके से करीब 79 लाख रुपये का गबन किया गया।

कई धाराओं में मामला दर्ज

राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो ने इस मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 6 जुलाई को कोरबा स्थित विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की अदालत में चार्जशीट पेश की गई। चार्जशीट दाखिल होना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। आरोपों का अंतिम निर्णय अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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