छत्तीसगढ़

Anti-Naxal Operation : कर्रेगुट्टा के 23 दिन के ऑपरेशन ने तोड़ी नक्सलियों की सबसे बड़ी साजिश…! 99% बस्तर IED मुक्त…278 बारूदी सुरंगें बरामद

आधुनिक तकनीक और स्थानीय सहयोग से सफलता

जगदलपुर, 22 जून। Anti-Naxal Operation : बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। नक्सलियों के सबसे घातक हथियार माने जाने वाले इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान में सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल की है। सुरक्षाबलों के मुताबिक बस्तर संभाग का करीब 99 प्रतिशत क्षेत्र आईईडी मुक्त किया जा चुका है, जबकि शेष एक फीसदी दुर्गम इलाकों में भी विशेष सर्च और डी-माइनिंग अभियान लगातार जारी है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में बस्तर रेंज से कुल 278 आईईडी बरामद किए गए हैं। इस अवधि में केवल 9 विस्फोट की घटनाएं सामने आई हैं, जो नक्सलियों की रणनीति को विफल करने में सुरक्षा बलों की बढ़ती सफलता को दर्शाती हैं।

कर्रेगुट्टा ऑपरेशन बना टर्निंग प्वाइंट

बस्तर के कर्रेगुट्टा पहाड़ी क्षेत्र में चलाया गया 23 दिनों का लंबा अभियान नक्सल विरोधी अभियानों में मील का पत्थर साबित हुआ। इस दौरान सबसे अधिक संख्या में आईईडी बरामद किए गए, जिससे नक्सलियों की उस रणनीति का खुलासा हुआ, जिसके तहत वर्षों से सड़कों, पगडंडियों और संभावित ऑपरेशन क्षेत्रों में विस्फोटक छिपाकर सुरक्षा बलों और ग्रामीणों को निशाना बनाने की तैयारी की जाती रही थी।

बस्तर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल संयुक्त रूप से रोड ओपनिंग पार्टी (ROP), बम निरोधक दस्तों, अत्याधुनिक उपकरणों, तकनीकी निगरानी और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई सूचनाओं के आधार पर विस्फोटकों की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय कर रहे हैं। बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि माओवादियों द्वारा पूर्व में लगाए गए अधिकांश आईईडी को निष्क्रिय किया जा चुका है। हालांकि पूरे क्षेत्र को पूर्ण रूप से आईईडी मुक्त घोषित करने से पहले व्यापक तलाशी अभियान जारी रहेगा।

मानसून में भी नहीं रुकेगा अभियान

सुरक्षाबलों ने स्पष्ट किया है कि मानसून के दौरान (Bastar Anti-Naxal Operation) और उसके बाद भी डी-माइनिंग अभियान जारी रहेगा। इसका उद्देश्य ऐसे सभी संवेदनशील इलाकों को सुरक्षित बनाना है, जहां अभी भी विस्फोटक छिपे होने की आशंका बनी हुई है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आईईडी मुक्त वातावरण बनने से अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास कार्यों को भी नई गति मिलेगी तथा ग्रामीणों का विश्वास और मजबूत होगा।

Related Articles

Back to top button