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छत्तीसगढ़ के 36 हजार वकीलों के लिए बड़ी खबर: स्टेट बार काउंसिल ने CM विष्णुदेव साय को सौंपा 12 सूत्रीय मांग पत्र, मिला जल्द कार्रवाई का आश्वासन

रायपुर।छत्तीसगढ़ के अधिवक्ताओं के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और पेशागत सुविधाओं को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण विकास सामने आया है। राज्य के करीब 36 हजार वकीलों के हितों की रक्षा के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद (स्टेट बार काउंसिल) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की।

अध्यक्ष  रविन्द्र कुमार पाराशर के नेतृत्व में हुई इस रविवार (14 जून 2026) की देर रात बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के अधिवक्ताओं की गंभीर समस्याओं को उठाते हुए 12 सूत्रीय मांगों का एक व्यापक ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री ने सभी मांगों को बेहद गंभीरता से सुना और इस पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करने का मजबूत आश्वासन दिया है।

न्याय व्यवस्था के मजबूत स्तंभ हैं अधिवक्ता: मुख्यमंत्री

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने समाज और न्याय प्रणाली में वकीलों की भूमिका की जमकर सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा “न्याय व्यवस्था को सुदृढ़, पारदर्शी और सुलभ बनाने में अधिवक्ताओं का योगदान अतुलनीय है। अधिवक्ताओं के कल्याण से जुड़े विषयों पर सरकार पूरी तरह संवेदनशील है।”
उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सौंपे गए मांग पत्र का संबंधित विभागों से तत्काल परीक्षण कराया जाएगा और हितैषी कदम उठाए जाएंगे।

ये हैं वकीलों की 12 प्रमुख मांगें (At a Glance)
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि राज्य की न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने वाले 36 हजार अधिवक्ताओं के लिए सामाजिक सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ज्ञापन में शामिल मुख्य मांगें इस प्रकार हैं

 

अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम: छत्तीसगढ़ में वकीलों की सुरक्षा के लिए तत्काल ‘अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम’ (Advocate Protection Act) लागू किया जाए।

आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा: अधिवक्ता मृत्यु सहायता राशि में वृद्धि की जाए और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना शुरू हो।
मेडिकल और इंश्योरेंस: सभी अधिवक्ताओं के लिए सामूहिक बीमा योजना और निःशुल्क चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था हो।

बुनियादी ढांचा: जिला एवं तहसील अधिवक्ता संघों में मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाए। लाइब्रेरी व अकादमी भवन निर्माण हेतु राशि स्वीकृत हो।

युवा वकीलों को संबल: नव नामांकित (जूनियर) अधिवक्ताओं के लिए छात्रवृत्ति सहायता और नियमित प्रशिक्षण के लिए वार्षिक अनुदान मिले।
विशेष बजट एवं छूट: बार काउंसिल के संचालन के लिए विशेष बजट का प्रावधान हो और अधिवक्ताओं को टोल टैक्स में छूट प्रदान की जाए।

प्रतिनिधिमंडल की गरिमामयी उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण बैठक में स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष रविन्द्र कुमार पाराशर के साथ उपाध्यक्ष विराट वर्मा, कोषाध्यक्ष नरेन्द्र सोनी, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के सदस्य शैलेन्द्र दुबे और कार्यकारी उपाध्यक्ष आलोक गुप्ता प्रमुख रूप से शामिल रहे।

इसके अलावा परिषद सदस्यगण सर्वश्री शत्रुहन सिंह साहू, प्रभाकर चंदेल, भास्कर साहू, गणेश राम गुजराल, फैसल रिजवी, ब्रजेशनाथ पाण्डेय, विवेकानंद भोई, रूपेश त्रिवेदी, प्रशांत तिवारी, रवि राजपूत, चंद्रप्रकाश जांगड़े, संतोष वर्मा तथा सचिव अमित वर्मा, दीपक ठाकुर और टीकाराम साहू भी उपस्थित रहे।

आभार और भविष्य की उम्मीद

स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष  रविन्द्र कुमार पाराशर ने मुख्यमंत्री के सकारात्मक और संवेदनशील रवैये के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इन मांगों के पूरे होने से न सिर्फ वकीलों को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि इससे छत्तीसगढ़ की न्यायिक व्यवस्था और अधिक सशक्त व प्रभावी बनेगी। प्रतिनिधिमंडल ने पूर्ण विश्वास जताया है कि मुख्यमंत्री के इस आश्वासन के बाद अधिवक्ताओं की लंबे समय से लंबित मांगों का निराकरण बहुत जल्द धरातल पर दिखाई देगा।

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