
राजनांदगांव। अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ जिला प्रशासन ने ऐसी कार्रवाई की, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। कलेक्टर जितेन्द्र यादव के निर्देश पर खनिज विभाग और राजस्व विभाग की टीम ने शिवनाथ नदी से अवैध रूप से निकाली गई रेत को दोबारा नदी में डलवा दिया। प्रशासन की इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और अवैध खनन पर सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक ऑक्सीजोन स्थित शिवनाथ नदी तट पर अवैध रूप से डंप की गई करीब 54 ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत को सरपंच, वार्ड पार्षद और ग्राम प्रमुखों की मौजूदगी में फिर से नदी में डाला गया। प्रशासन का कहना है कि इससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
बताया गया कि कुछ दिन पहले खनिज एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने इलाके में कार्रवाई करते हुए दो ट्रैक्टर-ट्रॉली और एक लोडर वाहन जब्त किया था। जांच में सामने आया कि भंवरमरा निवासी अविनाश सोनी द्वारा शिवनाथ नदी से अवैध उत्खनन कर रेत का भंडारण किया गया था। इसके बाद प्रशासन ने सिर्फ जब्ती तक सीमित न रहते हुए पूरी रेत को वापस नदी में डलवाने का फैसला लिया।
प्रदेश में संभवतः यह पहला मामला माना जा रहा है, जब नदी से निकाली गई अवैध रेत को दोबारा उसी नदी में डलवाया गया। अब तक आमतौर पर अवैध खनन मामलों में वाहन जब्ती और जुर्माने की कार्रवाई होती रही है, लेकिन इस कदम ने नई बहस छेड़ दी है।
रेत के अंधाधुंध उत्खनन से नदियों के अस्तित्व पर खतरा लगातार बढ़ रहा है। कई इलाकों में जलस्तर गिरने और नदी धाराओं के कमजोर होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञ भी मानते हैं कि सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि अवैध उत्खनन को स्रोत पर ही रोकना सबसे जरूरी है।
इधर, इस कार्रवाई के बाद कोरबा में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। गौमाता चौक समेत शहर के कई हिस्सों में खुलेआम डंप रेत पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि राजनांदगांव की तर्ज पर सख्ती दिखाई जाए, तो अवैध भंडारण पर बड़ा असर पड़ सकता है।



