
न्यूज डेस्क।ईरान ने अमेरिका के साथ जारी तनाव और संघर्ष को खत्म करने के लिए एक नया और संशोधित प्रस्ताव पेश किया है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट Axios के मुताबिक, इस प्रस्ताव को लेकर जानकारी एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी और मामले से जुड़े एक सूत्र ने दी है. रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान की ओर से भेजा गया यह नया प्रस्ताव दोनों देशों के बीच किसी बड़े समझौते की दिशा में एक कोशिश माना जा रहा था. लेकिन व्हाइट हाउस ने इसे फिलहाल खारिज कर दिया है. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान का यह ऑफर ‘पर्याप्त नहीं’ है और इससे व्यापक शांति समझौते की गारंटी नहीं मिलती.
इस घटनाक्रम के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल देखने को मिला. ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 1.5 फीसदी बढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. विश्लेषकों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच अनिश्चितता की वजह से तेल बाजार में घबराहट बनी हुई है. दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए किसी समझौते तक पहुंच पाएंगे या फिर हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो सकते हैं.
बैकफुट पर आ गया था अमेरिका?
इसके पहले ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच अब बातचीत में नरमी के संकेत दिखाई देने लगे थे. ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया था कि अमेरिका उसकी फ्रीज की गई संपत्तियों में से करीब 25 फीसदी हिस्से को अनफ्रीज करने पर सहमत हो गया है. ये वही अरबों डॉलर की संपत्तियां हैं जिन्हें अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत रोक दिया गया था. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, हालिया बातचीत में अमेरिका ने दोनों देशों के बीच विवाद खत्म करने को लेकर पहले के मुकाबले ज्यादा लचीलापन दिखाया है. इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने की दिशा में कोई बड़ा समझौता हो सकता है.
ईरान ने पाकिस्तान के जरिए भेजा था संशोधित प्रस्ताव!
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को अपना संशोधित प्रस्ताव भेजा था. वो इस प्रस्ताव में सबसे प्रमुख मांग युद्ध की स्थायी समाप्ति का था. इसके अलावा ईरान ने उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाने और वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोलने की बात भी रखी थी. वहीं इन बातों के जानकारों का मानना हैं कि अगर दोनों देशों के बीच समझौता आगे बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है, जहां किसी भी तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई देता है.



