
कोरबा । कोयले की कालिख और भारी मशीनों की गूंज के बीच अब कोरबा की पहचान बदलने वाली है। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) ने वर्ष 2026-27 के लिए जो खाका खींचा है, वह केवल सरकारी आंकड़ों का पुलिंदा नहीं, बल्कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक ‘विजन डॉक्यूमेंट’ है। कलेक्टर सभाकक्ष में आयोजित शासी परिषद की बैठक में साफ़ कर दिया गया कि अब जिले का पैसा न सिर्फ सड़कों पर बिछेगा, बल्कि बच्चों के भविष्य और मरीजों की सांसों में भी नजर आएगा।

तकनीक का पहरा: ‘निर्माण पोर्टल’ से भ्रष्टाचार पर चोट
प्रशासन ने इस बार सबसे बड़ा दांव पारदर्शिता पर लगाया है। ‘निर्माण पोर्टल’ का शुभारंभ कर जिले की सभी परियोजनाओं को ‘डिजिटल स्क्रीन’ पर ला दिया गया है। अब फाइलों में काम पूरा दिखाकर फंड डकारने वालों की खैर नहीं होगी। इस डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए फंड की एक-एक पाई और निर्माण की ईंट-ईंट की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जा सकेगी।
शिक्षा पर निवेश: सरकारी स्कूलों में दिखेगा ‘मेटावर्स’ का जादू
इस कार्ययोजना की सबसे ‘चमकदार’ कड़ी शिक्षा बजट है। ₹255 करोड़ की भारी-भरकम राशि से कोरबा के 16 ‘पीएम श्री’ स्कूलों की तस्वीर बदलने जा रही है।
VR लैब: अब यहाँ के बच्चे किताबों के साथ-साथ ‘वर्चुअल रियलिटी’ लैब के जरिए ब्रह्मांड की सैर करेंगे और विज्ञान के कठिन प्रयोगों को जीवंत अनुभव करेंगे।
आवासीय कोचिंग: मध्यमवर्गीय परिवारों के डॉक्टर और इंजीनियर बनने के सपने को उड़ान देने के लिए जिला प्रशासन खुद NEET और JEE की आवासीय कोचिंग की जिम्मेदारी उठाएगा।
सेहत और सुविधा: घर-घर तक पहुंचेगी डॉक्टर और नल की धार
जिले ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ₹67.18 करोड़ का कवच तैयार किया है। खनन प्रभावित दूरस्थ अंचलों में ‘मोबाइल मेडिकल यूनिट’ और एम्बुलेंस का जाल बिछाया जाएगा, ताकि इलाज के अभाव में कोई दम न तोड़े। वहीं, जल संकट के स्थाई समाधान के लिए 150 नए ट्यूबवेल और पर्यावरण हितैषी सौर ऊर्जा संचालित पंपों की स्थापना की जाएगी।
782 गाँवों का ‘डिजिटल डेटा’ और ग्रीन कॉरिडोर
विकास अंधाधुंध न हो, इसके लिए 5 विकासखंडों के 782 गाँवों का व्यापक बेसलाइन सर्वे किया जा रहा है। इसी डेटा के आधार पर आगामी 5 साल की रणनीति बनेगी। वहीं, प्रदूषण से जूझते कोरबा को राहत देने के लिए ‘एंटी-स्मॉग गन’ और सघन वृक्षारोपण के जरिए ‘ग्रीन बेल्ट’ विकसित करने पर जोर दिया गया है।
बजट का 70 प्रतिशत हिस्सा उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों (स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल) को देना यह दर्शाता है कि प्रशासन अब ‘कंक्रीट के जंगल’ के बजाय ‘मानव विकास’ पर केंद्रित है। यदि यह कार्ययोजना धरातल पर ठीक वैसी ही उतरी जैसी कागज पर है, तो कोरबा खनिज संपदा के सही उपयोग का वैश्विक मॉडल बन सकता है।
बजट एक नजर में:
शिक्षा: ₹255 करोड़
स्वास्थ्य: ₹67.18 करोड़
प्राथमिकता क्षेत्र: कुल राशि का 70%
दायरा: 5 ब्लॉक, 782 गाँव



