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Korba Breaking: गरीबों के घर का पैसा डकारने वाला शातिर को EOW ने किया गिरफ्तार.. ‘कियोस्क बैंक की आड़ में 79 लाख किया गबन…

कोरबा।Korba PMAY Scam EOW Arrest गरीबों के सिर पर छत देने वाली सरकारी योजना को ही ठगी का जरिया बना दिया गया। कोरबा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (पूर्व इंदिरा आवास) के नाम पर 79 लाख रुपए के बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), रायपुर की कार्रवाई में 16 अप्रैल को रूमगरा निवासी कियोस्क संचालक गौरव शुक्ला (47) को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने बीपीएल परिवारों की मेहनत की रकम पर डाका डालते हुए सुनियोजित तरीके से करोड़ों की सरकारी मदद को अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया।

गांव वालों के भरोसे पर वार, चुपचाप खाली किए खाते

 

Korba PMAY Scam EOW Arrest जांच में सामने आया कि आरोपी ने उन ग्रामीणों को निशाना बनाया, जिन्हें बैंकिंग प्रक्रियाओं की सीमित जानकारी थी। उनके खातों में आई आवास योजना की राशि को धीरे-धीरे अपने और अपने परिजनों के खातों में शिफ्ट करता रहा। कई हितग्राहियों को सालों तक भनक तक नहीं लगी कि उनके नाम की रकम गायब हो चुकी है।

2017 में रचा गया बड़ा खेल, पुरानी किश्तों पर नजर

 

EOW के मुताबिक, 2010-11 में इंदिरा आवास योजना के तहत जो राशि अलग-अलग किश्तों में हितग्राहियों के खातों में आई थी, उसी को 2017 में निशाना बनाया गया। आरोपी ने पुराने और निष्क्रिय खातों को ट्रैक कर सुनियोजित तरीके से रकम हड़प ली।

डॉर्मेंट खाते, स्टाफ आईडी और आधार से छेड़छाड़ पूरी साजिश

 

चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी बैंक ऑफ इंडिया की कोरबा शाखा में कियोस्क संचालक था। उसने बैंक कर्मचारियों की स्टाफ आईडी का दुरुपयोग कर डॉर्मेंट खातों को सक्रिय कराया। इसके बाद असली हितग्राहियों के आधार नंबर हटाकर अपने और रिश्तेदारों के आधार नंबर लिंक कर दिए। AEPS के जरिए बायोमेट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए रकम सीधे अपने खातों में ट्रांसफर करता रहा।

 

सिस्टम की कमजोरी बनी हथियार, Finacle सॉफ्टवेयर में सेंध

 

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने बैंकिंग सॉफ्टवेयर Finacle की खामियों का फायदा उठाया। उस समय आधार लिंकिंग का कड़ा वेरिफिकेशन और ऑटो लॉगआउट जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं कमजोर थीं। अपने अनुभव और सिस्टम की समझ के दम पर उसने इस पूरी ठगी को लंबे समय तक अंजाम दिया।

620 एंट्री, 10 यूजर आईडी घोटाले का बड़ा नेटवर्क

 

EOW की जांच में खुलासा हुआ कि आधार सीडिंग के लिए 10 अलग-अलग स्टाफ यूजर आईडी का इस्तेमाल किया गया। कुल 620 एंट्री की गईं, जिनमें ज्यादातर बिना किसी फिजिकल वेरिफिकेशन के थीं। इससे साफ है कि मामला अकेले व्यक्ति से ज्यादा बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है।

कोर्ट सख्त, 21 अप्रैल तक रिमांड

 

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कोरबा न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 21 अप्रैल तक EOW की रिमांड पर भेज दिया गया है। आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 420, 421, 409, 120(बी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।

 

सवाल बड़ा है कौन-कौन शामिल?

 

यह मामला सिर्फ एक ठगी नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और निगरानी की कमी का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस खेल में और कौन-कौन शामिल है और कितने गरीबों के सपनों पर इस तरह डाका डाला गया। जांच अभी जारी है।

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