CEO का प्रभार बदलने का अधिकार कलेक्टर को नहीं… हाईकोर्ट ने आदेश रद्द कर बहाली के दिए निर्देश

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बिलासपुर, 05 अप्रैल। CEO : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कलेक्टर की प्रशासनिक शक्तियों की सीमा स्पष्ट करते हुए कहा है कि जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) का प्रभार बदलने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है।

न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू की एकलपीठ ने इस मामले में कलेक्टर द्वारा जारी आदेश को निरस्त कर दिया और याचिकाकर्ता शुभा दामोदर मिश्रा को पुनः उनके पद पर बहाल करने के निर्देश दिए।

मामले के अनुसार, शुभा दामोदर मिश्रा को 18 जून 2025 को आदिम जाति विकास विभाग, रायपुर द्वारा जनपद पंचायत गौरेला (जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) में CEO पद पर नियुक्त किया गया था। वे जून 2025 से इस पद पर कार्यरत थीं।

इसी बीच 11 मार्च 2026 को जिला कलेक्टर ने आदेश जारी कर उन्हें CEO के प्रभार से हटाते हुए सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, गौरेला के कार्यालय में पदस्थ कर दिया।

इस आदेश के खिलाफ शुभा मिश्रा ने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया कि 11 अप्रैल 2025 को प्रमुख सचिव, आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, शासन द्वारा नियुक्त CEO को हटाने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है और इसके लिए राज्य शासन की अनुमति आवश्यक है।

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए कलेक्टर के आदेश को निरस्त कर दिया और शुभा दामोदर मिश्रा को पुनः मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत गौरेला के पद पर पदस्थ करने के निर्देश दिए।

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