
प्रतीकात्मक तस्वीर
रायपुर। जिले में लंबे समय से जारी अवैध रेत खनन और परिवहन के मामलों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने खनन माफिया पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
एनजीटी के निर्देश पर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। जांच जिला मजिस्ट्रेट और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) के प्रतिनिधि संयुक्त रूप से करेंगे। जांच रिपोर्ट 42 दिनों के भीतर एनजीटी की केंद्रीय पीठ, भोपाल को सौंपी जाएगी।
कार्रवाई के आंकड़े, लेकिन सवाल बरकरार
जिला खनिज विभाग ने बीते एक वर्ष में रेत, मुरुम, गिट्टी और फर्शी पत्थर के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के मामलों में कार्रवाई करते हुए 1,132 वाहनों को पकड़ा। इसके अलावा पोकलेन और चेन माउंटेन सहित करीब 40 मशीनें जब्त की गईं। इन मामलों में कुल 3 करोड़ 85 लाख रुपये का अर्थदंड वसूला गया।
हालांकि एनजीटी ने इन कार्रवाइयों को सतही मानते हुए गंभीर आपत्ति जताई है। अधिकतर मामलों में मौके पर ही जुर्माना वसूल कर प्रकरण समाप्त कर दिया गया और उन्हें एनजीटी को भेजा ही नहीं गया, जिससे बड़े मामलों पर कठोर कार्रवाई नहीं हो सकी।
एनजीटी का साफ संदेश
एनजीटी ने स्पष्ट कहा है कि अवैध रेत खनन केवल राजस्व की चोरी नहीं, बल्कि गंभीर पर्यावरणीय अपराध है। ऐसे मामलों में सिर्फ वाहन जब्ती या जुर्माना पर्याप्त नहीं है। दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी अनिवार्य है।
इसी आधार पर एनजीटी ने सीईसीबी के सदस्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि अवैध रेत खनन में संलिप्त व्यक्तियों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और 42 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को होगी।



