Acid Attack : दर्दनाक…! सहेली की सुंदरता से जलन में अमानवीय हरकत…युवती ने दोस्त के चेहरे पर फेंका एसिड…घेरे में आरोपी
फर्जी दस्तावेजों से हासिल किया एसिड

जबलपुर, 15 जुलाई। Acid Attack : शहर के अवधपुरी कॉलोनी में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। 22 वर्षीय श्रद्धा दास पर उसकी ही बचपन की सहेली इशिता साहू ने तेजाब फेंक दिया, जिससे श्रद्धा बुरी तरह झुलस गई है और अस्पताल में जीवन और मौत के बीच जूझ रही है। घटना 29 जून की सुबह की है, जिसने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी।
श्रद्धा की तरक्की से और भड़क उठी इशिता
श्रद्धा और इशिता एक ही कॉलोनी की निवासी थीं और बचपन में गहरी दोस्ती थी। लेकिन कुछ साल पहले इशिता का एक आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके लिए उसने श्रद्धा को ज़िम्मेदार ठहराया। तभी से उसने बदला लेने की ठान ली थी।
हाल ही में श्रद्धा को पश्चिम बंगाल की एक प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी मिली थी। उसकी सुंदरता और करियर की सफलता से ईर्ष्या करती इशिता ने क्रूर योजना बनाई और उसकी जिंदगी तबाह करने का फैसला कर लिया।
इशिता ने ज्ञान गंगा कॉलेज के फर्जी लेटरहेड और दस्तावेजों के जरिए सिविक सेंटर स्थित अनुप्रास ट्रेडर्स से सल्फ्यूरिक एसिड खरीदा। इस काम में उसके दोस्त अंश शर्मा ने फर्जी प्रोफेसर बनकर मदद की, जो अभी फरार है।
29 जून को इशिता ने श्रद्धा को यह कहकर घर के बाहर बुलाया कि वह उससे आखिरी बार मिलना चाहती है। जैसे ही श्रद्धा बाहर आई, इशिता ने बोतल से 100 एमएल एसिड उसके चेहरे पर फेंक दिया। श्रद्धा की चीख-पुकार सुनकर मां दौड़ीं और पानी से चेहरा धोया, लेकिन तब तक एसिड अपना कहर दिखा चुका था।
गिरफ्तारी के बाद पूछा: “मर गई क्या?”
घटना के बाद इशिता मौके से फरार हो गई, लेकिन पुलिस ने जल्द ही उसे पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद उसका सबसे पहला सवाल था- “वो मर गई क्या? मुझे फांसी होगी?” यह सुन पुलिस भी स्तब्ध रह गई।
बहरहाल, मेडिकल कॉलेज में भर्ती श्रद्धा का चेहरा और ऊपरी शरीर 50% तक झुलस चुका है। डॉक्टरों के मुताबिक उसकी स्थिति गंभीर है और लगातार निगरानी की जा रही है।
कड़ी धाराओं में केस दर्ज
गोरखपुर सीएसपीपी नागोटिया (Acid Attack) ने बताया कि हत्या की कोशिश और एसिड अटैक की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इशिता की मदद करने वाला अंश शर्मा अभी भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। इस वीभत्स घटना ने फिर साबित कर दिया है कि अपराधी चेहरा नहीं पहचानते, और कभी-कभी सबसे बड़ा ज़ख्म दोस्ती ही दे जाती है।