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कोरबा: हाथी के हमले में 35 वर्षीय युवक की मौत, मानव-हाथी द्वंद पर फिर उठे सवाल

कोरबा NPZ कोरबा में मानव-हाथी द्वंद :कटघोरा वनमंडल के जटगा वन परिक्षेत्र अंतर्गत धवलपुर गांव में एक बार फिर मानव-हाथी द्वंद की गंभीर तस्वीर सामने आई है। बीती रात 35 वर्षीय संतोष कुमार गोंड की जंगली हाथी के हमले में मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार संतोष अपनी लापता भैंस की तलाश में जंगल गया था। इसी दौरान उसका सामना विचरण कर रहे हाथी से हो गया। हाथी के हमले में उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। आवश्यक कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मामले की जांच की जा रही है।

मानव-हाथी द्वंद बना बड़ी चुनौती

 

कोरबा जिला लंबे समय से मानव-हाथी संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। कटघोरा, पसान, ऐतमानगर, जटगा, केंदई और आसपास के वन क्षेत्रों में हाथियों की नियमित आवाजाही बनी रहती है। भोजन और आवास की तलाश में हाथियों के गांवों और खेतों की ओर आने से ग्रामीणों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

सबसे अधिक खतरा जंगल पर निर्भर ग्रामीणों को

ग्रामीणों का जीवन आज भी जंगल और कृषि पर निर्भर है। मवेशियों की तलाश, लकड़ी, महुआ, तेंदूपत्ता या अन्य वनोपज एकत्र करने के लिए लोगों को प्रतिदिन जंगल जाना पड़ता है। ऐसे में हाथियों से आमना-सामना होने का जोखिम बढ़ जाता है। अधिकांश घटनाएं शाम, रात या तड़के सुबह के समय सामने आती हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार हाथी सामान्यतः मनुष्यों पर हमला नहीं करते, लेकिन यदि वे स्वयं को असुरक्षित महसूस करें, अचानक आमना-सामना हो जाए या उनके झुंड के पास कोई पहुंच जाए, तो हमला होने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में सतर्कता और समय पर सूचना तंत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

ग्रामीणों की मांग

घटना के बाद धवलपुर सहित आसपास के गांवों के लोगों ने हाथियों की गतिविधियों की नियमित निगरानी, समय पर अलर्ट, गश्त बढ़ाने तथा प्रभावित क्षेत्रों में प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए मानव जीवन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलित एवं दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है।

यह घटना एक बार फिर इस तथ्य को रेखांकित करती है कि कोरबा में मानव-हाथी द्वंद केवल वन्यजीव संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा और आजीविका से जुड़ा गंभीर सामाजिक एवं प्रशासनिक मुद्दा बन चुका है।

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