
वर्दी में लटा पटा !
बांके बिहारी की देख जटा मेरो मन होय लटा पटा…मुंगेली जिला के धार्मिक कार्यक्रम का एक वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया और पुलिस महकमे के अफसरों की बीच में जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में जिले के पुलिस कप्तान भोजराम पटेल वर्दी में चंदन तिलक लगाए भगवान बांके बिहारी की भक्ति में भक्तों के साथ लटा पटा..होते दिखाई दे रहे हैं।
असल में प्रदेश में जब से सरकार बदली और राम राज्य आया तब से यहां के नेता और अफसर ज्यादा धार्मिक हो गए हैं। पहले की बात अलग थी तब आउटर के रिसोर्ट या किसी रेस्ट हाउस के कमरे में झूम लेते थे..अब दिन बदल गए हैं। रिसोर्ट और रेस्ट हाउस के कमरे से पुलिस के अफसर दूरी बनाने लगे हैं पता नहीं कब बंद कमरे की खबर बाहर आ जाए और बस्तर रवानगी के साथ उनका लटा पटा..हो जाए।
असल में किसी धार्मिक कार्यक्रम में चंदन टीका लेपकर लटा पटा..होने के कई फायदे हैं। सोशल मीडिया में फालोवर्स बढ़ जाते हैं और सरकार के नजर में नंबर भी बढ़ जाता है। वैसे भी मुंगेली, डिप्टी सीएम अरुण साव का गृह जिला है…साव खुद भी धार्मिक स्वाभाव के हैं तो अगर जिले के पुलिस कप्तान बांके बिहारी की भक्ति में लटा पटा… होने लगे तो क्या हर्ज।
असल में महकमे में ट्रेंड बना हुआ है..सयाना अफसर वही है जो सरकार के बदलने के साथ खुद बदल जाए …इससे जिला भी बच जाता है और कृपा मिली सो अलग..। अब अगर कप्तान महकमें की इसी ट्रेंड का फॉलो कर रहे हैं तो है ये हैरानी वाली बात नहीं भाई समझदारी वाली बात है। बाकी की बात बांके बिहारी जानें..।
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काफिला चला सांय-सायं, गोली चली ठाय-ठाय, सुरक्षा हाय हाय
कहते हैं ऊर्जाधानी की हवा बड़ी सुरक्षित है, यहाँ पर पंछी भी पर बिना अनुमति नहीं मार सकता। लेकिन 10 सितंबर को हुआ उलटा जो नहीं होना चाहिए था।
राजधानाई शोर के बीच सांय-सायं काफिले का रौब, वहां सुनाई दी ठाय-ठाय गोलियों की आवाज़। और सुरक्षा के रखवाले बने सस्पेंस मूवी के खलनायक।
कहते हैं जब आंखों में अरमान हों और ठान लिया जाए, तो मुश्किल क्या और आसान क्या। ठीक इसी जिद को आत्मसात कर सीएएफ का एक जवान फिल्मी अंदाज़ में दिनदहाड़े बंदूक लेकर पत्नी पर हमला करने निकला। किस्मत से पत्नी घर पर नहीं थी, लेकिन सामने आई साली, जिसने विरोध किया और मौत को गले लगा बैठी।
इस सनसनीखेज वारदात के बाद सुरक्षा ढांचे पर सवालों की बौछार शुरू हो गई है। सूत्र बताते हैं कि जवान की ड्यूटी रिजर्व बल में लगी थी, जहां हथियार केवल विशेष परिस्थिति में दिए जाते हैं। तो फिर उसे बंदूक और गोलियां कैसे अलॉट हो गईं? और सुरक्षा में तैनात रहते हुए वह बाहर कैसे निकल गया कि जिम्मेदारों को भनक तक न लगी? अब यक्ष प्रश्न ये है कि ये सुरक्षा है या सुराख-क्षा? लोग कह रहे हैं, “वाह! क्या मैनेजमेंट है..!! ऐसा टैलेंट तो हॉलीवुड भी नहीं ढूँढ पाता।”
कहा तो यहां तक जा रहा है कि महकमे के ही लोगों ने जवान के इरादों को परवान चढ़ाया। उसे नजदीक से जानने वाले कहते हैं “जब दिल टूटता है तो आवाज नहीं आती, मगर भीतर तूफान जरूर उठता है” वही तूफान इस बार गोलियों की गड़गड़ाहट बनकर फूटा है।
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मालिक के मसलमैन की पुलिस फैन
एसईसीएल की खदानों में किसानों की जमीन खाली कराने उतरे मालिक के मसलमैन के आगे पुलिस भी ऐसी नतमस्तक हुई मानो कोई भक्त अपने भगवान के आगे। स्थिति ऐसी फिल्मी बनी कि खदान में उतरी महिला बाउंसरों को देखकर भू-विस्थापितों को अंग्रेजों का ज़माना याद आ गया। अंतर मात्र इतना रह गया है कि तब फिरंगी लाल कोट में आते थे, और अब बाउंसर ब्लैक ड्रेस में। जनता बोली – “वाह री सुशासन की सरकार, गरीबों पर अत्याचार… राम राम!”
रंगे सियार की तरह कुसमुंडा कोयला खदान से ओवर बर्डन का काम कर रही गुजरात की कंपनी नीलकंठ अब अपना असली रंग दिखाने लगी है। हाल ही में डंडे की नोक पर किसानों से जमीन खाली कराने के बाद महिला बाउंसरों के जरिए गरीबों को डराने का रियलिटी शो शुरू हो चुका है। दबंगई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो अमीर धरती के गरीब बेटे-बेटियां सुशासन और बाउंसरशाही के बीच पिसते हुए सरकार को कोसने लगे।
चर्चा इस बात की भी है कि नीलकंठ की मनमानी पर कानून के रखवाले जिस कदर खामोश रहे, उससे लोग उनके सोच को ही सलाम करने लगे। और रही बात ‘चाय पर चर्चा’ करने वालों की, तो पुलिस की चुप्पी पर भी खूब चटखारे लिए जा रहे हैं – “सांप भी मर गया और लाठी भी सलामत, पर मज़ा ये कि सांप मालिक के बिल में ही घुसा है।” यह भी कहा जा सकता है कि पुलिस अब मात्र कंपनी के मसलमैन फैन क्लब की VIP मेंबर नजर आ रही है।
माया मिल रही न राम… दबाव में काम
नगर निगम के अफसरों की दिनचर्या अब साधु-संतों जैसी हो गई है। न माया मिल रही, न राम। कभी नगर सरकार की चरण वंदना करने वाले ये अफसर अब ऐसी दुविधा में हैं कि मुस्कुराकर भी रो रहे हैं। शहर सरकार में माया न राम, सब भाजपाई ठेकेदारों के नाम की तर्ज पर काम चल रहा है।
असल में जब से सत्ता बदली तो काम का तरीका भी बदल गया। महीनों से टेंडर दबाकर बैठने वाले इंजीनियरों को आयुक्त ने नोटिस थमा दिया। अब हालत यह है कि अफसरों के सामने दो ही रास्ते हैं”एक तरफ कुआँ, दूसरी तरफ खाई..कुल मिलाकर आफत में जान वाली सिचुएशन बन गई है। अफसर इस सोच में दुबले हुए जा रहे हैं कि खुश किसे करें बॉस या “बॉस ऑफ बॉस”?
खबर है कि एक ठेकेदार-नुमा नेता ऐसा दबाव बना रहा है कि 16 में से 14 टेंडर रिजेक्ट कर दिए जाएं। मगर अफसर नियमों का पाठ पढ़ा रहे हैं, मगर दबाव की लाठी के सामने नियम बेअसर हो रहे हैं। निगम के “मनी-मैनेजमेंट सिस्टम” पर अब तो भाजपा के अपने नेता भी दबी जुबान में कहने लगे हैं…इससे अच्छा तो पिछली सरकार थी।
अगले सप्ताह तक नया चीफ सिकरेट्री
छत्तीसगढ़ को अगले सप्ताह तक नया चीफ सिकरेट्री मिल जाएगा। वर्तमान चीफ सिकरेट्री अमिताभ जैन के एक्सटेंशन समाप्त होने में सिर्फ 13 दिन बचे हैं। चीफ सिकरेट्री के लिए वैसे तो नाम आधा दर्जन आईएएस अधिकारियों के चल रहे हैं। मगर एडीबी में मनीला में पोस्टेड विकास शील और भारत सरकार में कार्यरत अमित अग्रवाल का नाम अटकलों में इस समय उपर चल रहे हैं। दोनों छत्तीसगढ़ कैडर के अधिकारी हैं।
94 बैच के आईएएस विकास शील एशियाई डेवेलपमेंट बैंक मनीला से वे रिलीव हो गए हैं। उनकी आईएएस पत्नी निधि छिब्बर की जगह नीति आयोग में नई पोस्टिंग हो गई है। वे कल नीति आयोग से रिलीव हो जाएंगी।
12 सितंबर को डीओपीटी से उन्हें वापस भेजने पत्र भेजा गया। वे वहाँ से रिलीव हुए और उनकी जगह नई नियुक्ति भी हो गई। पता चला है, विकास शील कल भारत लौट रहे हैं। दो-एक दिन में उनका डेपुटेशन खत्म कर छत्तीसगढ़ लौटने का आदेश भी जारी हो जाएगा। खबर है, अगले हफ्ते वे रायपुर आ जाएंगे।
संभावना ये भी है कि हफ्ता भर पहले उन्हें नए मुख्य सचिव बनाने का आदेश जारी हो जाए। चीफ सिकरेट्री की दौड़ में 94 बैच के मनोज पिंगुआ, आईएएस अधिकारी सुब्रत, आईएएस रेणु पिल्ले की चर्चा है। फिलहाल अगला चीफ सिकरेट्री कौन होगा ये अगले सप्ताह स्पष्ट हो जाएगा।
✍️अनिल द्विवेदी , ईश्वर चन्द्रा




