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UAE–Iran Tension News : ईरान के हमलों से हिला दुबई का ‘सेफ हेवन’ मॉडल, लंबा चला युद्ध तो निवेश और बाजार पर गहरा असर

नेशनल डेस्क | Dubai Safe Haven Model खाड़ी में बढ़ता तनाव और दुबई की बदलती तस्वीर दशकों से दुबई को चमकती गगनचुंबी इमारतों, टैक्स फ्री सैलरी, आसान कारोबार और सबसे बढ़कर एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में देखा जाता रहा है। मध्य पूर्व में चाहे कितने भी संघर्ष हुए हों, यह धारणा बनी रही कि उनका असर दुबई तक नहीं पहुंचेगा। लेकिन शनिवार को हालात ने इस सोच को झकझोर दिया।

ईरान की जवाबी कार्रवाई में खाड़ी क्षेत्र के कई ठिकाने निशाने पर आए और असर दुबई के अहम हिस्सों तक पहुंचा। एयरपोर्ट, होटल और बंदरगाह प्रभावित हुए। नुकसान सिर्फ ढांचागत नहीं था, बल्कि उस भरोसे को भी चोट लगी, जो चार दशकों में तैयार हुआ था।

सुरक्षित ठिकाने की छवि पर पहली बड़ी चोट

संयुक्त अरब अमीरात ने स्थिति संभालने के लिए तुरंत कदम उठाए। यूएई की नेशनल इमरजेंसी, क्राइसिस एंड डिजास्टर्स मैनेजमेंट अथॉरिटी ने हालात को नियंत्रण में बताया। इसके बावजूद जिन लोगों ने मिसाइल हमलों का मंजर देखा, उनमें बेचैनी बनी हुई है।
Rice University Baker Institute के फेलो जिम क्रेन के मुताबिक खतरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता। फिलहाल असर मनोवैज्ञानिक ज्यादा है, लेकिन यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो प्रवासी समुदाय और निवेशक विकल्प तलाश सकते हैं। वैश्विक पूंजी तेजी से स्थान बदलती है।

बंद बाजार, प्रभावित सेवाएं और रुकी उड़ानें

सोमवार और मंगलवार को यूएई के शेयर बाजार बंद रहे। कुछ बैंकिंग सेवाएं भी प्रभावित हुईं। उड़ानें रद्द होने से बड़ी संख्या में यात्री फंसे रहे।
दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट को नुकसान पहुंचा, जबकि जेबेल अली पोर्ट के एक हिस्से में आग लगी। मशहूर होटल बुर्ज अल अरब को भी मिसाइल रोधी प्रणाली के मलबे से नुकसान हुआ। यूएई रक्षा मंत्रालय के अनुसार तीन लोगों की मौत और 58 लोग घायल हुए।

कैसे बना ‘ब्रांड दुबई’

दुबई का सफर एक छोटे मोती और मछली पकड़ने वाले बंदरगाह से वैश्विक वित्तीय केंद्र बनने तक का है।
1985 में Emirates की शुरुआत
1999 में बुर्ज अल अरब का उद्घाटन
2000 के दशक की शुरुआत में विदेशियों को संपत्ति खरीदने की अनुमति
इन फैसलों ने शहर की पहचान बदल दी।
आज दुबई की अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह गैर तेल क्षेत्रों पर आधारित है। कुल अर्थव्यवस्था में तेल की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम है। व्यापार, पर्यटन, रियल एस्टेट और वित्तीय सेवाएं इसकी रीढ़ हैं।
2004 में दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर की स्थापना ने इसे वैश्विक वित्तीय मानचित्र पर मजबूती से खड़ा किया। 2025 के अंत तक यहां सैकड़ों बैंक, हेज फंड, वेल्थ मैनेजमेंट फर्म और फैमिली ऑफिस सक्रिय थे।
क्षेत्रीय अस्थिरता से मिला फायदा, अब वही जोखिम
दुबई ने अक्सर क्षेत्रीय संकटों से अवसर निकाले।
सीरिया संघर्ष
अरब स्प्रिंग

यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से निकले निवेशक

इन सबके दौरान पूंजी और प्रतिभा दुबई आई।
1980 में यूएई की आबादी करीब 10 लाख थी, जो 2024 में 1.1 करोड़ से अधिक हो चुकी है। Henley & Partners के अनुसार पिछले वर्ष सबसे ज्यादा करोड़पति यूएई में बसने पहुंचे।
रणनीतिक कमजोरी: होरमुज जलडमरूमध्य
होरमुज जलडमरूमध्य से दुनिया के समुद्री रास्ते जाने वाले कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। दुबई इसकी भौगोलिक सीमा के करीब है। दूसरी ओर ईरान है, जिसके पास खाड़ी व्यापार को प्रभावित करने की क्षमता है। यही कारण है कि मौजूदा हालात ने जोखिम की धारणा बदल दी है।

निवेशकों की बढ़ती चिंता

Edmond de Rothschild Asset Management के नबील मिलाली का कहना है कि पहली बार लोगों को भूमिगत शरण लेनी पड़ी। निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में बदलाव शुरू कर दिया है।
कुछ कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या घटाने और फंड जुटाने की योजनाएं रोक दी हैं। सोने की मांग बढ़ी है। निजी बैंक भी अपनी क्षेत्रीय रणनीति पर पुनर्विचार कर रहे हैं।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि असर इस बात पर निर्भर करेगा कि तनाव कितने समय तक चलता है। यदि स्थिति जल्दी सामान्य हो जाती है तो पूंजी का बड़े पैमाने पर पलायन संभव नहीं दिखता।
लेकिन यदि संघर्ष लंबा चला, तो दुबई की सबसे बड़ी ताकत, उसकी सुरक्षित छवि, गंभीर परीक्षा से गुजरेगी।
दुबई ने महामारी जैसे संकटों से उबरकर खुद को साबित किया है। अब देखना यह है कि क्या वह इस चुनौती से भी उसी मजबूती के साथ निकल पाता है या नहीं। आने वाले सप्ताह इस शहर की साख और स्थिरता के लिए निर्णायक हो सकते हैं।

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