Featuredकोरबासामाजिक

Korba Breaking: RTE की रकम डकारने वाले कौशिल विद्यालय पर DEO मेहरबान..! रिकवरी आदेश के बाद भी गबन की रकम अटकी

कोरबा। RTE Reimbursement : शहर के तुलसीनगर स्थित गौरव युवा मण्डल तुलसीनगर कोरबा द्वारा संचालित कौशिल उ.मा.वि. तुलसीनगर कोरबा (शाला कोड 332029) एक बार फिर सुर्खियों में है। आरटीई की दावा प्रतिपूर्ति में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद जांच में बड़े वित्तीय अनियमितता के संकेत मिले हैं। आरोप है कि सत्र 2023-24 में नर्सरी से 12वीं तक के विद्यार्थियों के नाम पर फर्जी प्रविष्टियां दर्ज कर लगभग 11,36,336 रुपये की राशि आहरित कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।

RTE Reimbursement जांच में यह भी सामने आया कि जिन बच्चों के नाम पर राशि निकाली गई, वे वर्तमान में किस संस्था में अध्ययनरत हैं, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। मामले की जांच के बाद प्राचार्य के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए 3,27,208 रुपये की वसूली योग्य राशि चालान के माध्यम से शासकीय कोष में जमा कराने के आदेश जारी किए गए थे।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि आदेश जारी होने के बाद भी अब तक उक्त राशि जमा नहीं हो सकी है। ऐसे में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय कोरबा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं और पूरे मामले में विभागीय उदासीनता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

 

क्या है पूरा मामला

 

तुलसीनगर में संचालित कौशिल विद्यालय के खिलाफ मिली शिकायत की जांच में खुलासा हुआ कि सत्र 2023-24 के लिए विद्यालय ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक कुल 129 विद्यार्थियों की सूची प्रस्तुत की थी, जिनमें 43 विद्यार्थियों को आरटीई के तहत प्रवेशित बताया गया। जबकि आरटीई पोर्टल में उसी सत्र के लिए केवल 56 विद्यार्थियों की स्वीकृति दर्ज थी।
रिकॉर्ड मिलान के दौरान 13 विद्यार्थियों की जानकारी सूची में नहीं पाई गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार इस अंतर और कथित गलत प्रस्तुतिकरण के कारण शासन को लगभग 11 लाख 36 हजार 336 रुपये की वित्तीय क्षति का उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद आदेश जारी होने के एक माह बाद भी राशि जमा नहीं होने से पूरे प्रकरण में सवाल और गहरे हो गए हैं।

 

नहीं उपलब्ध कराई जा रही जानकारी

सूत्रों के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय कोरबा ने मामले में कार्रवाई करते हुए कौशिल उ.मा.वि. तुलसीनगर कोरबा के प्रबंधन को स्कूल में अध्ययनरत विद्यार्थियों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। बताया जाता है कि सूची के माध्यम से यह स्पष्ट होना था कि जिन बच्चों के नाम पर आरटीई की राशि आहरित की गई, वे वास्तव में विद्यालय में पढ़ रहे थे या नहीं। हालांकि खबरीलाल की माने तो आदेश जारी होने के बाद भी अब तक विद्यालय प्रबंधन की ओर से अध्ययनरत छात्रों की पूरी सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। इससे मामले की जांच और वसूली प्रक्रिया दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Related Articles

Back to top button